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Ocean Warming Explained: समुद्र का बढ़ता तापमान क्यों बना दुनिया के लिए खतरा? जानिए समुद्री जीवन और इंसानों पर इसका कितना असर

ब्रिटेन के दक्षिणी समुद्री इलाकों में समुद्र का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच गया, जिसे वैज्ञानिक सामान्य स्थिति नहीं मान रहे हैं। पिछले चार वर्षों में यह तीसरी बार है जब ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्रों में तापमान में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश में जुटे हैं कि समुद्र के तापमान में असामान्य वृद्धि के दूरगामी प्रभाव क्या होते हैं और किन समुद्री प्रजातियों को इसका सबसे अधिक खतरा है।

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समुद्र के तापमान में हो रही असामान्य वृद्धि। (फोटो- AI)
Edited by: Shiv Shukla
Updated Jul 18, 2026, 22:53 IST

पृथ्वी का बढ़ता तापमान अब केवल जमीन तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर समुद्रों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के कई हिस्सों में समुद्र का तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है। हाल ही में ब्रिटेन के दक्षिणी समुद्री इलाकों में समुद्र का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच गया, जिसे वैज्ञानिक सामान्य स्थिति नहीं मान रहे हैं। पिछले चार वर्षों में यह तीसरी बार है जब ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्रों में तापमान में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। वैज्ञानिक इसे केवल एक मौसम संबंधी घटना नहीं, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं। इसका असर सूक्ष्म समुद्री जीवों से लेकर विशाल व्हेल तक और मछली उद्योग से लेकर मानव स्वास्थ्य तक दिखाई दे सकता है।

क्या होती है समुद्री हीटवेव?

जिस तरह जमीन पर कई दिनों तक अत्यधिक तापमान रहने पर हीटवेव घोषित की जाती है, उसी तरह जब किसी समुद्री क्षेत्र का तापमान लगातार कम से कम पांच दिनों तक सामान्य से काफी अधिक बना रहता है, तो उसे समुद्री हीटवेव (Marine Heatwave) कहा जाता है। यह केवल पानी के गर्म होने की घटना नहीं होती, बल्कि इससे समुद्र के पूरे जैविक संतुलन पर असर पड़ता है।

समुद्र पृथ्वी की अतिरिक्त गर्मी का बड़ा हिस्सा अपने भीतर समाहित कर लेते हैं। लेकिन जब यह गर्मी लगातार बढ़ती रहती है, तो समुद्र का प्राकृतिक तापमान संतुलन बिगड़ जाता है। इसका सीधा असर उन जीवों पर पड़ता है, जो विशेष तापमान पर ही जीवित रह सकते हैं।

समुद्र का तापमान क्यों बढ़ रहा है?

वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। जीवाश्म ईंधनों के बढ़ते उपयोग, औद्योगिक गतिविधियों और ग्रीनहाउस गैसों के लगातार उत्सर्जन से पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है। इसका बड़ा हिस्सा समुद्र अवशोषित कर रहे हैं।

इसके अलावा एल-नीनो जैसी प्राकृतिक जलवायु घटनाएं भी कई क्षेत्रों में समुद्र को सामान्य से अधिक गर्म बना देती हैं। जब गर्म पानी, तेज धूप और शांत समुद्री परिस्थितियां एक साथ मिलती हैं, तो समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो समुद्री हीटवेव विकसित हो जाती है।

सबसे पहले प्रभावित होती है समुद्री जैव विविधता

समुद्र में रहने वाले अधिकांश जीव अपने आसपास के तापमान के अनुसार जीवन जीते हैं। इसलिए तापमान में थोड़ी-सी वृद्धि भी उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती है। सबसे अधिक नुकसान समुद्री घास (Seagrass), केल्प (Kelp Forest) और प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) को होता है। ये समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की नींव मानी जाती हैं। हजारों समुद्री जीव इन्हीं पर भोजन, प्रजनन और आश्रय के लिए निर्भर रहते हैं। जब बढ़ते तापमान के कारण ये नष्ट होने लगती हैं, तो पूरा समुद्री खाद्य तंत्र प्रभावित होता है। प्रवाल भित्तियों के सफेद पड़ने (Coral Bleaching) की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। यदि तापमान लंबे समय तक ऊंचा बना रहे, तो ये हमेशा के लिए नष्ट हो सकती हैं।

मछलियां बदल रही हैं अपना ठिकाना

समुद्र के गर्म होने का सबसे बड़ा असर मछलियों के व्यवहार में देखा जा रहा है। कई ठंडे पानी की प्रजातियां अब अपने पारंपरिक आवास छोड़कर अपेक्षाकृत ठंडे इलाकों की ओर जा रही हैं। ब्रिटेन में मछुआरों ने बताया है कि कॉड जैसी ठंडे पानी में रहने वाली मछलियां अब उत्तर की ओर खिसक रही हैं। वहीं, गर्म पानी पसंद करने वाली प्रजातियां पहले से अलग क्षेत्रों में दिखाई देने लगी हैं। इससे केवल जैव विविधता ही नहीं बदल रही, बल्कि मत्स्य उद्योग की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जब किसी क्षेत्र से मछलियां कम हो जाती हैं, तो उन पर निर्भर समुद्री पक्षियों और अन्य शिकारी जीवों के सामने भी भोजन का संकट पैदा हो जाता है।

ऑक्टोपस और जेलीफिश क्यों बढ़ रही हैं?

वैज्ञानिकों ने पाया है कि ब्रिटेन के डेवोन और कॉर्नवाल के आसपास ऑक्टोपस की संख्या सामान्य से अधिक बढ़ी है। माना जा रहा है कि गर्म समुद्री जल ने इनके लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की हैं। ये ऑक्टोपस बड़ी संख्या में केकड़ों और लॉब्स्टर का शिकार कर रहे हैं, जिससे स्थानीय मत्स्य उद्योग प्रभावित हुआ है। कई मछुआरों ने अब अपने कारोबार का तरीका बदलते हुए ऑक्टोपस पकड़ना शुरू कर दिया है।

इसी तरह कई समुद्री क्षेत्रों में जेलीफिश की संख्या बढ़ने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि समुद्र तटों पर लोगों की बढ़ती मौजूदगी के कारण ऐसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक दर्ज हो रही हैं।

जहरीले एल्गल ब्लूम क्यों हैं चिंता का विषय?

समुद्र का बढ़ता तापमान केवल जीवों की संख्या नहीं बदलता, बल्कि कई बार खतरनाक परिस्थितियां भी पैदा करता है। जब गर्म पानी, पर्याप्त पोषक तत्व और तेज धूप मिलती है,तो सूक्ष्म शैवाल तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसे एल्गल ब्लूम (Algal Bloom) कहा जाता है। इनमें से कुछ शैवाल ऐसे विषैले पदार्थ बनाते हैं जो शेलफिश के शरीर में जमा हो जाते हैं। यदि ऐसे दूषित समुद्री भोजन का सेवन किया जाए,तो गंभीर बीमारी या मौत तक हो सकती है। यही कारण है कि कई देशों में समुद्री जैव-विषों की लगातार निगरानी की जाती है।

समुद्री तापमान बढ़ने से इंसानों पर क्या असर पड़ेगा?

समुद्र के बढ़ते तापमान का प्रभाव केवल समुद्री जीवों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर इंसानों की आजीविका, भोजन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। मत्स्य उद्योग दुनिया भर में करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। यदि मछलियों का वितरण बदलता है या उनकी संख्या घटती है, तो लाखों मछुआरों की आय प्रभावित हो सकती है। समुद्री भोजन की उपलब्धता कम होने पर कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसके अलावा समुद्री पर्यटन,तटीय अर्थव्यवस्था और समुद्री जैव विविधता पर आधारित कई उद्योगों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

2011 की समुद्री हीटवेव ने क्या सिखाया?

समुद्री हीटवेव शब्द पहली बार 2011 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में व्यापक रूप से चर्चा में आया था। उस समय समुद्र का तापमान लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहा। इसके परिणामस्वरूप समुद्री घास के विशाल मैदान नष्ट हो गए। केल्प, प्रवाल भित्तियां, झींगे, केकड़े, एबालोन और कई मछलियों की आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार उस पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ हिस्सों को सामान्य होने में कई वर्ष लग गए, जबकि कुछ क्षेत्र आज भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं। यह घटना बताती है कि समुद्री हीटवेव के प्रभाव कई वर्षों तक बने रह सकते हैं।

वैज्ञानिक किन सवालों के जवाब खोज रहे हैं?

हालांकि समुद्री तापमान में बढ़ोतरी के कई प्रभाव सामने आ चुके हैं, लेकिन वैज्ञानिक अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि दीर्घकाल में इसका असर कितना व्यापक होगा। विशेषज्ञ यह जानना चाहते हैं कि कौन-सी प्रजातियां सबसे अधिक जोखिम में हैं, कौन-से समुद्री क्षेत्र सबसे संवेदनशील हैं और मत्स्य प्रबंधन की कौन-सी रणनीतियां भविष्य में नुकसान को कम कर सकती हैं। इसी उद्देश्य से कई देशों में समुद्री हीटवेव से जुड़े दर्जनों शोध प्रश्नों पर काम चल रहा है।

समुद्र का बढ़ता तापमान केवल वैज्ञानिकों की चिंता नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। यदि समुद्री हीटवेव की घटनाएं इसी तरह बढ़ती रहीं, तो समुद्री जैव विविधता, मत्स्य उद्योग, खाद्य सुरक्षा और तटीय अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। समुद्र पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए समुद्रों को गर्म होने से रोकना केवल समुद्री जीवों को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य को सुरक्षित रखने की भी आवश्यकता है।

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