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अंतरिक्ष में लुका-छिपी का चल रहा था खेल, खगोलविदों ने खोज निकाला पृथ्वी से सीधे दिखने वाला सबसे धुंधला ग्रह; देखें तस्वीरें

Beta Pictoris Star System: खगोलविदों ने गलती से एक ऐसा ग्रह खोज निकाला, जो लगभग 10 वर्षों से लुका-छिपी का खेल खेल रहा था। हमारी मिल्की वे आकाशगंगा में ऐसे कई रहस्य छिपे हुए हैं और खगोलविद लगातार उनसे पर्दा उठाने की कोशिशें कर रहे हैं।

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पृथ्वी से दिखने वाला अब तक का सबसे धुंधला एक्सोप्लैनेट (फोटो साभार: ESO/B. Sutlieff, M. Bonse et al.)

Beta Pictoris star System: अनंत ब्रह्मांड में मौजूद असंख्य आकाशगंगाओं में से एक हमारी मिल्की वे में भी कई रहस्य छिपे हुए हैं और खगोलविद बड़े और उन्नत टेलीस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में झांकने की कोशिशें कर रहे हैं ताकि इन रहस्यों से पर्दा उठाया जा सके। इसी कड़ी में खगोलविदों ने पृथ्वी से सीधे इमेज किए गए अब तक के सबसे धुंधले एक्सोप्लैनेट बीटा पिक्टोरिस डी (Beta Pictoris d) की खोज की है।

अनजाने में हुई खोज

दरअसल, खगोलविद इस एक्सोप्लैनेट की खोज नहीं कर रहे थे, बल्कि वह तो पुराने आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे थे तभी संयोगवश उन्हें 'बीटा पिक्टोरिस डी' मिल गया।

बीटा पिक्टोरिस डी नामक एक्सोप्लैनेट बीटा पिक्टोरिस (Beta Pictoris) नामक तारे की परिक्रमा करता है, जो पृथ्वी से लगभग 64 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इस ग्रह की पहली स्पष्ट पहचान 2025 में हुई, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह पिछले एक दशक से भी अधिक समय से अलग-अलग टेलीस्कोप के डेटा में मौजूद था।

यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला ने 'बीटा पिक्टोरिस डी' की तस्वीर जारी की है। साइंस अलर्ट की एक रिपोर्ट में ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के खगोलविद और शोध के सह-प्रमुख बेन सटलिफ के हवाले से बताया गया है कि उनकी टीम पहले से ज्ञात ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस बी' का अध्ययन कर रही थी ताकि यह समझा जा सके कि समय के साथ उसमें क्या-क्या परिवर्तन हुए हैं। इसी दौरान, डेटा में एक और बेहद हल्की वस्तु दिखाई दी, जिसने खगोलविदों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बाद में जब उसका विस्तृत जांच की गई तो बीटा पिक्टोरिस ताराप्रणाली का तीसरा ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस डी' दिखाई दिया।

सूर्य से 9 गुना ज्यादा चमकीला है बीटा पिक्टोरिस

बीटा पिक्टोरिस तारा पिक्टर तारामंडल का दूसरा सबसे चमकीला तारा है। इसका द्रव्यमान सूर्य से लगभग दोगुना, आकार में लगभग 50 फीसदी बड़ा और लगभग नौ गुना अधिक चमकीला है। बीटा पिक्टोरिस महज 2.3 करोड़ वर्ष पुराना तारा है, इसलिए इसे युवा तारा माना जाता है। इस तारे के चारों तरफ धूल, गैस और चट्टानों की विशाल डेब्रिस डिस्क (Debris Disk) मौजूद है, जहां पर नए ग्रहों का निर्माण हो रहा है।

Beta Pictoris Star

बीटा पिक्टोरिस तारा और उसके आसपास का ब्रह्मांडीय क्षेत्र (फोटो साभार: ESO/Digitized Sky Survey 2)

गैसीय दानव

यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के मुताबिक, इस तारा प्रणाली में पहले से दो विशाल गैसीय ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस बी' और 'बीटा पिक्टोरिस सी' मौजूद हैं, जिनका द्रव्यमान बृहस्पति से लगभग 10 गुना अधिक है, जबकि नया ग्रह 'बीटा पिक्टोरिस डी' अन्य दोनों ग्रहों की तुलना में काफी छोटा और कम द्रव्यमान वाला है। इसका द्रव्यमान बृहस्पति का महज 2.4 गुना है।

बीटा पिक्टोरिस डी का तापमान

'बीटा पिक्टोरिस डी' का तापमान लगभग 330 डिग्री सेल्सियस है, जो इसके अन्य पड़ोसी ग्रहों की तुलना में काफी कम है। इसकी कक्षा भी अन्य ग्रहों से कहीं अधिक दूर है और यह अपने तारे से लगभग उतनी दूरी पर स्थित है, जितनी हमारे सौरमंडल में 'नेपच्यून' सूर्य से है।

इसके अलावा, किसी एक्सोप्लैनेट की सीधे तस्वीर लेना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वह अपने मूल तारे की अरबों गुना ज्यादा चमकार रोशनी में खो जाता है।खगोलविदों के मुताबिक, 'बीटा पिक्टोरिस डी', 'बीटा पिक्टोरिस बी' की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक धुंधला है। यही वजह है कि इसे पृथ्वी से सीधे छवि में देखा गया अब तक का सबसे धुंधला एक्सोप्लैनेट माना जा रहा है।

पुराने डेटा में वर्षों से छिपा था ग्रह

खगोलविदों ने इस खोज के लिए यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के पुराने रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। यह शोध The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित हुई है।

Beta Pictoris D Research

बीटा पिक्टोरिस डी (फोटो साभार: ESO/B. Sutlieff, M. Bonse et al.)

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की खगोलविद जेन बिर्कबी के मुताबिक, 'बीटा पिक्टोरिस डी' ग्रह पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से वैज्ञानिकों के डेटा में मौजूद था, लेकिन उसकी पहचान इतने वर्षों बाद हो सकी।

खगोलविदों को मिली नई उम्मीद

इस ग्रह की खोज से खगोलविदों को नई उम्मीद मिली है। खगोलविदों का मानना है कि यह खोज इस बात का प्रमाण है कि पुराने डेटा में अब भी कई अहम खोजें छिपी हो सकती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन तारा प्रणालियों में एक से अधिक ग्रहों की सीधे इमेजिंग हो चुकी है, वे ग्रहों के निर्माण और विकास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। सनद रहे कि बीटा पिक्टोरिस अब एचआर 8799 (HR 8799) के बाद दूसरी ऐसी ग्रह प्रणाली बन गई है, जहां दो से अधिक ग्रहों की सीधे इमेजिंग की गई है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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