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अरबों साल पहले आखिर कैसे बने महासागर? सिर चकरा देंगे इसके अद्भुत रहस्य

How Oceans Were Formed: महासागर पृथ्वी की सबसे खूबसूरत और रहस्यमयी प्राकृतिक संरचनाओं में से एक हैं, जिनकी गहराइयों में अनगिनत जीवन रूप और अद्भुत रहस्य बसे हैं। ये विशाल जलराशियां हमारे ग्रह के तापमान, जलवायु और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। अरबों वर्षों पहले शुरू हुई प्राकृतिक प्रक्रियाओं ने मिलकर इन भव्य महासागरों को जन्म दिया, जो आज पृथ्वी की पहचान बन चुके हैं।

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आखिर कैसे बने महासागर?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

How Oceans Were Formed: महासागर हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और रहस्यमयी प्राकृतिक संरचनाओं में से एक हैं। इनकी गहराइयों में अनगिनत जीव, अद्भुत पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) और अनजाने रहस्य छिपे हुए हैं। नीले विस्तार की यह सुंदरता न केवल मन को आकर्षित करती है, बल्कि पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखने, ऑक्सीजन उत्पादन करने और जलवायु को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मानव जीवन, व्यापार, मौसम और जैव विविधता सब पर महासागरों का गहरा प्रभाव है। हमारा ग्रह पृथ्वी अंतरिक्ष से नीला दिखाई देता है, जिसका मुख्य कारण इसकी सतह पर जल की भारी मात्रा है।

कुल सतह का करीब 71% हिस्सा महासागरों से आच्छादित है। पृथ्वी पर पांच प्रमुख महासागर पाए जाते हैं। इनमें, आर्कटिक (Artic Ocean), अटलांटिक (Atlantic Ocean), हिंद (Indian Ocean), प्रशांत (Pacific Ocean) और दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) शामिल हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये विशाल महासागर बने कैसे? (How Oceans Were Formed) वैज्ञानिकों के अनुसार, अरबों वर्ष पहले पृथ्वी के भीतर से लगातार गैसें निकलने की प्रक्रिया ने महासागरों के निर्माण की शुरुआत की। उस समय पृथ्वी इतनी गर्म थी कि पानी केवल भाप के रूप में मौजूद था। जैसे-जैसे तापमान घटकर लगभग 212°F से नीचे आया, जल वाष्प संघनित होकर तरल पानी में बदलने लगी, जिससे महासागरों का गठन संभव हुआ। ऐसे में आइए, अब पृथ्वी की सतह पर महासागरों के बनने के दो प्रमुख संभावित सिद्धांतों को समझते हैं।

How Oceans Were Formed? (Photo: Canva)

महासागर कैसे बने?

पहला संभावित सिद्धांत

करीब 4.5 अरब वर्ष पहले पृथ्वी का वातावरण इतना गर्म था कि यहां तरल जल का अस्तित्व संभव ही नहीं था। अत्यधिक तापमान के कारण चट्टानें पिघली हुई अवस्था में थीं। उस समय ज्वालामुखी विस्फोटों (Volcano Eruption) के दौरान कई गैसें बाहर निकलती थीं, जिनमें जल वाष्प (Water Vapor) भी शामिल थी। जैसे-जैसे ग्रह धीरे-धीरे ठंडा होने लगा, वही जलवाष्प संघनित होकर करोड़ों सालों तक लगातार बारिश के रूप में पृथ्वी पर गिरती रही। अनेक वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी लंबी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप पृथ्वी की सतह पर जल का संचय हुआ और आगे चलकर महासागरों का निर्माण संभव हुआ।

दूसरा संभावित सिद्धांत

धूमकेतु (Comets) मूल रूप से बर्फ और धूल के विशाल गोले होते हैं, जिन्हें तारों और ग्रहों के बनने के बाद शेष बची सामग्री माना जाता है। इसी तरह, क्षुद्रग्रह (Asteroids) बड़े पत्थरीले खगोलीय पिंड हैं, जिन्हें लघु ग्रह या ग्रहिका भी कहा जाता है और ये भी उस समय की बची हुई वस्तुएं हैं जब हमारा सौरमंडल आकार ले रहा था। जब कोई क्षुद्रग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वह उल्का कहलाता है। अधिकतर उल्काएं घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो जाती हैं, पर कभी-कभी इनके कुछ अंश बच जाते हैं, जिन्हें उल्कापिंड (Meteorites) कहा जाता है। कई वैज्ञानिकों का यह भी मत है कि पृथ्वी के महासागरों में मौजूद कुछ पानी इन्हीं धूमकेतुओं, क्षुद्रग्रहों और उल्काओं के माध्यम से पहुंचा।

How Oceans Were Formed? (Photo: Canva)

महासागर कैसे बने?

अस्तित्व में आए महासागर

कार्बोनेसियस कोंड्राइट (Carbonaceous Chondrite), जो उल्कापिंडों का एक विशिष्ट प्रकार है, अपने भीतर बड़ी मात्रा में जल रखता है। पिछले कई अनुसंधानों में वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि इनमें मौजूद पानी की रासायनिक संरचना पृथ्वी के जल से काफी हद तक मिलती-जुलती है। माना जाता है कि जब ये पानी से भरपूर उल्कापिंड पृथ्वी से टकराए, तो उनका जल सतह पर बने विशाल गड्ढों में जमा हो गया। समय के साथ यही जल एकत्र होकर महासागरों का रूप लेता चला गया, और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण ने इसे अंतरिक्ष में फैलने से रोके रखा। इस प्रकार, वैज्ञानिकों के अनुसार महासागरों की उत्पत्ति इन्हीं प्रक्रियाओं से जुड़ी हो सकती है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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