'आप इस देश के नागरिकों की निजता से खिलवाड़ नहीं कर सकते', SC ने WhatsApp और Meta को जमकर सुनाया
- Authored by: गौरव श्रीवास्तवEdited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Feb 3, 2026, 12:23 PM IST
CJI सूर्यकांत ने मेटा से कहा कि हम मेटा के साथ एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। CJI ने कहा कि हम आपको इस देश की प्राइवेसी के साथ खेलने की इजाजत नहीं देंगे। व्हाट्सएप, मेटा के साथ डेटा शेयर नहीं कर सकता।
Meta और WhatsApp पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
SC On WhatsApp And Meta: सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप (WhatsApp) और मेटा (Meta) को चेतावनी दी है कि डेटा साझाकरण के नाम पर आप इस देश के नागरिकों के निजता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा पर सुनवाई के दौरान दोनों पर सख्त टिप्पणियां कीं। अदालत ने मेटा की पॉलिसी पर सख्त नाराजगी जताई। CJI सूर्यकांत ने मेटा से कहा कि हम मेटा के साथ एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। CJI ने कहा कि हम आपको इस देश की प्राइवेसी के साथ खेलने की इजाजत नहीं देंगे। व्हाट्सएप, मेटा के साथ डेटा शेयर नहीं कर सकता। CJI सूर्यकांत ने WhatsApp से कहा कि आप इस देश के संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं। आप इस तरह लोगों की प्राइवेसी के अधिकार के साथ कैसे खेल सकते हैं? लोग इसके लिए आपको पैसे देते हैं। कंज्यूमर के पास कोई विकल्प नहीं है, आपने मोनोपॉली बना ली है।
WhatsApp और Meta से हलफनामा दाखिल करने को कहा
CJI ने WhatsApp और मेटा (Meta) से हलफनामा दाखिल ये बताने को कहा है कि, वे डेटा शेयर नहीं करेंगे। CJI ने कहा कि अगर ऐसा एफिडेविट फाइल नहीं किया गया तो मामला खारिज कर दिया जाएगा। SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हमारा पर्सनल डेटा सिर्फ बेचा ही नहीं जाता, बल्कि उसका कमर्शियल इस्तेमाल भी होता है। CJI ने कहा कि एक सड़क पर सामान बेचने वाला वेंडर आपके टर्म और कंडीशन को कैसे समझ सकता है। ऐसे टर्म और कंडीशन की जांच होनी चाहिए। CJI ने पूछा कि देश का एक बड़ा हिस्सा आपकी शर्तों और नियमों को कैसे समझेगा?
आपने कंज्यूमर्स को ऐप का आदी बनाया है
आप अपना कमर्शियल इंटरेस्ट जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि आपने कंज्यूमर्स को ऐप का आदी कैसे बनाया है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है। तमिलनाडु के किसी गांव में बैठा व्यक्ति, जो सिर्फ अपनी भाषा समझता है, वह आपकी शर्तें कैसे समझेगा? आप एक अंडरटेकिंग दीजिए, फिर हम केस की मेरिट के आधार पर सुनवाई करेंगे। WhatsApp डेटा इकट्ठा करने और बेचने के लिए नहीं है। आप मैसेजिंग और कम्युनिकेशन सर्विस देने के लिए हैं। हम आपको कई उदाहरण दिखा सकते हैं। आप अपने डॉक्टर से दवाइयां मांगते हैं, जैसे ही वह प्रिस्क्रिप्शन भेजते हैं। आप देखेंगे कि 5 मिनट में आपके पास क्या मैसेज आते हैं?
ऑनलाइन विज्ञापन के मकसद से डेटा का इस्तेमाल
जस्टिस बागची ने कहा कि DPDP एक्ट सिर्फ प्राइवेसी के बारे में बात करता है। आप ऑनलाइन विज्ञापन के मकसद से डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं। मेटा के वकील ने कहा कि फैसले को मानते हुए पेनल्टी पूरी तरह से चुका दी गई है। अपील के अधीन 213 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई आने वाले सोमवार 9 फरवरी को सुनवाई करेगा।
डेटा शेयरिंग को बताया चोरी जैसा तरीका
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप की डेटा शेयरिंग नीति की तुलना एक शालीन तरीके से चोरी करने से की। कोर्ट ने कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के कारोबारी हितों के लिए भारतीय नागरिकों की निजी जानकारी से समझौता किया जाए।
डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत भी सवाल
जस्टिस बागची ने कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट सिर्फ प्राइवेसी की बात नहीं करता बल्कि यह भी देखता है कि डेटा का इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां ऑनलाइन विज्ञापन के लिए डेटा इस्तेमाल किए जाने के आरोप हैं, जो गंभीर हैं।
मेटा ने पेनल्टी चुकाने की बात कही
मेटा के वकील ने कोर्ट को बताया कि संबंधित आदेश को मानते हुए कंपनी ने पूरी पेनल्टी चुका दी है और अपील के अधीन 213 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि जुर्माना चुकाने से प्राइवेसी उल्लंघन की गंभीरता कम नहीं होती।
9 फरवरी को अगला आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि अगर कंपनियां बिना शर्त यह भरोसा नहीं देतीं कि वे डेटा शेयर नहीं करेंगी, तो उनकी अपील पर सुनवाई नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगला आदेश 10 फरवरी को पारित किया जाएगा।
मेटा को भारत के संविधान का पालन करना ही होगा, CJI का कड़ा संदेश
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर व्हाट्सएप और मेटा भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप एक मैसेजिंग सेवा है, न कि डेटा इकट्ठा करने और बेचने का प्लेटफॉर्म। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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