देश

'गठबंधन की राजनीति जैसी आज की दुनिया...', जयशंकर बोले- किसी के पास बहुमत नहीं, भारत को लचीला रुख अपनाना होगा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य ''गठबंधन की राजनीति'' की तरह है, जहां निष्ठाएं लगातार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में एक दौर गठबंधन की राजनीति का था। आज की दुनिया भी गठबंधन की राजनीति जैसी ही है। किसी के पास बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन को बहुमत हासिल नहीं है।

S Jaishankar

विदेश मंत्री एस जयशंकर (फोटो साभार: @DrSJaishankar)

Photo : Twitter

Coalition Politics: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य ''गठबंधन की राजनीति'' की तरह है, जहां निष्ठाएं लगातार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे परिदृश्य में लचीला रुख अपनाते हुए अपने हितों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

जयशंकर ने क्या कुछ कहा?

जयशंकर पुणे साहित्य महोत्सव में राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक के साथ 'कूटनीति से संवाद' विषय पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, "हमारे देश में एक दौर गठबंधन की राजनीति का था। आज की दुनिया भी गठबंधन की राजनीति जैसी ही है। किसी के पास बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन को बहुमत हासिल नहीं है। इसलिए लगातार गठबंधन बनते रहते हैं, सौदे होते रहते हैं, कोई ऊपर जाता है तो कोई नीचे। यह पूरी तरह से बहुध्रुवीय दुनिया है, जहां कई साझेदार हैं।"

'भारत को बहुत लचीला रुख अपनाना होगा'

जयशंकर ने कहा कि इस अस्थिर स्थिति से निपटने के लिए उनका मंत्र भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेना था। उन्होंने कहा, "हमें बहुत लचीला रुख अपनाना होगा। कभी-कभार आप किसी एक मुद्दे पर किसी के साथ होते हैं और किसी दूसरे मुद्दे पर किसी दूसरे के साथ। इन सबके बावजूद मेरा एक ही सिद्धांत है - जो मेरे देश के हित में हो। जो भी मेरे देश के हित में हो, वही मेरा फैसला होगा।" इस साहित्य महोत्सव का आयोजन पुणे पुस्तक महोत्सव के साथ किया जा रहा है।

अपनी एक पुस्तक के उस अंश के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने प्रमुख शक्तियों के साथ भारत के संबंधों पर चर्चा की है, जयशंकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश की विदेश नीति का प्रबंधन कहीं अधिक जटिल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘किताब लिखते समय मैं इस बात पर विचार कर रहा था कि भारत की समग्र विदेश नीति का एक वाक्य में वर्णन करने के लिए किन शब्दों का चुनाव करूं।’’

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में अमेरिका से संबंध बनाना, चीन का प्रबंधन करना और रूस को आश्वस्त करना, ये सभी चीजें अधिक जटिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन युद्ध और भारत पर मॉस्को से दूरी बनाए रखने के दबाव के कारण ‘रूस को आश्वस्त करना’ विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘जापान को शामिल करना भी अधिक जटिल हो गया है। वे अपनी गति से चलते हैं और हम उन्हें तेज गति से चलने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं।’’

'भारत से घनिष्ठ रूप से जुड़े हैं पड़ोसी देश'

उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है और उसके साथ अधिक जुड़ाव की आवश्यकता है। भारत के पड़ोस के बारे में उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध उन देशों की विषमता और अस्थिर घरेलू राजनीति से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसी देश हमसे छोटे हैं और भारत से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी आंतरिक राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कभी वे हमारी प्रशंसा करते हैं, कभी हमारी आलोचना करते हैं। ऐसे में चुनौती यह है कि इन संबंधों को यथासंभव स्थिर कैसे रखा जाए।’’

उदाहरण देते हुए जयशंकर ने कहा कि हाल ही में श्रीलंका में आए चक्रवात पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और सबसे पहले मदद के लिए पहुंचा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसियों से पूछिए कि कोविड के दौरान उन्हें टीके कहां से मिले - भारत से। यूक्रेन युद्ध के दौरान जब पेट्रोल और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित हुई, तो भारत ने मदद की।’’

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।

अनुराग गुप्ता
अनुराग गुप्ता author

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

End of Article