पूर्वोत्तर को एक बार फिर 'सुलगाने' का 'गंदा खेल', यूनुस के साथ मिलकर ISI ने बनाया है ये नापाक मंसूबा
- Reported by: Shivani MishraEdited by: आलोक कुमार राव
- Updated Dec 19, 2025, 11:12 AM IST
इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की ISI बांग्लादेश में बदलते सियासी हालात का फायदा उठाकर उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के मोस्ट वांटेड आतंकी परेश बरुआ को ढाका में फिर से बसाने की कोशिश कर रही है। जानकारी के मुताबिक, चीन के युन्नान प्रांत में छिपे परेश बरुआ को बांग्लादेश लाने की योजना है।
भारत के खिलाफ बांग्लादेश का इस्तेमाल करना चाहती है ISI। तस्वीर-AP
Bangladesh News: बांग्लादेश के विद्रोही नेता शरीफ उस्मानी हादी की मौत के बाद ढाका सहित कई इलाकों में हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुई हैं। बांग्लादेश उबाल पर है। रिपोर्टों के मुताबिक हादी की मौत के बाद उग्र भीड़ ने गुरुवार रात भर ढाका में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया। उग्र भीड़ ने देश को दो प्रतिष्ठित अखबारों के दफ्तरों पर धावा बोलकर उनमें आग लगा दी। अखबार डेली स्टार में लगाई गई आग में 25 पत्रकार फंस गए जिन्हें सुरक्षाबलों ने कड़ी मशक्कद के बाहर निकाला। इन सबके भारतीय इंटेलिजेंस के सूत्रों का इनपुट है कि पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) बांग्लादेश के सियासी हालात का फायदा उठाना चाहती है।
मो. यूनुस जब से अंतरिम सरकार के मुखिया बने हैं तब से पाकिस्तान के साथ बांग्लादेशी की करीबी बढ़ी है। पाकिस्तान सेना एवं आईएसआई के अधिकारियों ने कई बार बांग्लादेश का दौरा किया। पाकिस्तानी सेना के अधिकारी बांग्लादेश में उस जगह तक गए जहां से सामरिक रूप से संवेदनशील 'चिकेन नेक' करीब पड़ता है।
बांग्लादेश के सियासी हालात का फायदा उठाना चाहती है ISI
इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की ISI बांग्लादेश में बदलते सियासी हालात का फायदा उठाकर उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के मोस्ट वांटेड आतंकी परेश बरुआ को ढाका में फिर से बसाने की कोशिश कर रही है। जानकारी के मुताबिक, चीन के युन्नान प्रांत में छिपे परेश बरुआ को बांग्लादेश लाने की योजना है, ताकि भारत के उत्तर-पूर्व में आतंकी नेटवर्क दोबारा सक्रिय किए जा सके। भारत ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है।
परेश बरुआ पर धमाके, उगाही, हमले का आरोप
परेश बरुआ पर असम और उत्तर-पूर्व भारत में बम धमाकों, उगाही, हथियारों की तस्करी और भारतीय सुरक्षा बलों पर हमलों की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं। वह 2004 के चिटगांव हथियार कांड से भी जुड़ा रहा है।बरुआ असम के उग्रवादी संगठन (ULFA) के सबसे चर्चित और विवादास्पद नेताओं में से एक रहे हैं। उनका जन्म 1957 में असम के तिनसुकिया जिले में हुआ था। वे ULFA के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और लंबे समय तक संगठन के सेना प्रमुख (कमांडर-इन-चीफ) के रूप में सक्रिय रहे।
सशस्त्र संघर्ष के पक्षधर बरुआ
ULFA की स्थापना 1979 में असम को भारत से अलग कर एक संप्रभु राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से की गई थी। परेश बरुआ संगठन के भीतर सबसे कट्टर विचारधारा वाले नेता माने जाते थे। वे लगातार सशस्त्र संघर्ष के पक्षधर रहे और बातचीत या समझौते के विरोधी रहे। इसी कारण 2011 में जब ULFA के एक बड़े धड़े ने भारत सरकार से शांति वार्ता का रास्ता चुना, तब परेश बरुआ ने उससे अलग होकर ULFA इंडिपेंडेंट यानी ULFA-I का नेतृत्व संभाला।
बरुआ को सीमा पार से समर्थन!
परेश बरुआ पर कई गंभीर आरोप लगे, जिनमें सुरक्षाबलों पर हमले, अपहरण, जबरन वसूली और हिंसक गतिविधियों का संचालन शामिल है। भारत सरकार ने उन्हें आतंकवादी घोषित किया और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए। वे वर्षों तक भारत से बाहर, खासकर म्यांमार-चीन सीमा क्षेत्र में छिपकर संगठन की गतिविधियां चलाते रहे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना रहा है कि उन्हें सीमा पार से समर्थन भी मिलता रहा।
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