देश

होर्मुज हमले के बाद लापता भारतीय कैप्टन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, पत्नी ने लगाई न्याय की गुहार

DNA मिसमैच (मेल न खाने) ने मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष कुमार के भविष्य पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उनकी पत्नी अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं और दावा कर रही हैं कि वे जिंदा हैं और उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।

Image

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष कुमार की पत्नी, जिनके बारे में आशंका थी कि 1 मार्च, 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में मर्चेंट जहाज़ M.T. स्काईलाइट पर हुए मिसाइल/ड्रोन हमले में उनकी मौत हो गई है, सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं। उनका दावा है कि वे जिंदा हैं और विदेशी ताकतों द्वारा उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है। इसमें विदेश और गृह मंत्रालयों के ज़रिए भारत सरकार से मांग की गई है कि वे सभी उपलब्ध राजनयिक, कांसुलर और खुफिया चैनलों का इस्तेमाल करके कैप्टन आशीष कुमार का पता लगाएं और उन्हें पेश करें।

कैप्टन आशीष का जहाज ओमान के खसाब बंदरगाह के पास खड़ा था

याचिका के अनुसार, अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान 1 मार्च को मिसाइल/ड्रोन हमले का शिकार होने से पहले कैप्टन आशीष कुमार का जहाज ओमान के खसाब बंदरगाह के पास खड़ा था। क्रू के 20 सदस्यों में से 18 को बचा लिया गया, जबकि कैप्टन आशीष कुमार और एक अन्य भारतीय नागरिक के लापता होने की खबर मिली।

'भारतीय अधिकारियों ने शुरू में कैप्टन आशीष कुमार को मृत मान लिया था'

याचिकाकर्ता का कहना है कि भारतीय अधिकारियों ने शुरू में कैप्टन आशीष कुमार को मृत मान लिया था, क्योंकि कैप्टन के केबिन से जले हुए अवशेष मिले थे। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि यह धारणा तब गलत साबित हुई जब कैप्टन के छोटे भाई से लिए गए सैंपल के साथ DNA मिलान का नतीजा नेगेटिव आया।

'बरामद अवशेष कैप्टन आशीष कुमार के नहीं हैं'

याचिका के अनुसार, मस्कट में भारतीय दूतावास ने 15 मई, 2026 को परिवार को बताया कि बरामद अवशेष कैप्टन आशीष कुमार के नहीं हैं। याचिका में इसे पक्के साइंटिफिक सबूत के तौर पर बताया गया है, जो पहले की मौत की धारणा को गलत साबित करता है। याचिका में रॉयल ओमान पुलिस के 'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सर्च एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन' की ओर से जारी 'बायोलॉजिकल टेक्निकल एग्जामिनेशन रिपोर्ट' का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर जांचे गए हड्डियों के टुकड़ों से कोई मानवीय DNA परिणाम नहीं मिला।

दावे के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का भी जिक्र

DNA से मिली जानकारी के अलावा, याचिका में इस दावे के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का भी ज़िक्र किया गया है कि कैप्टन आशीष कुमार हमले में बच गए थे। इसमें कहा गया है कि हमले वाले दिन उनकी पत्नी ने जो WhatsApp मैसेज भेजा था, वह जहाज पर हमले के तीन घंटे से भी ज़्यादा समय बाद उनके दूसरे मोबाइल फ़ोन पर सफलतापूर्वक डिलीवर हो गया था। इससे पता चलता है कि घटना के बाद भी वह डिवाइस चालू था।

'याचिकाकर्ता को अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फ़ोन नंबरों से फिरौती के लिए कॉल आए'

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि 4 मार्च, 2026 को याचिकाकर्ता को अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फ़ोन नंबरों से फिरौती के लिए कॉल आए थे। कॉल करने वालों ने कथित तौर पर कैप्टन आशीष कुमार की रिहाई के लिए 20 लाख रुपये की मांग की और दावा किया कि वह जिंदा हैं और उनकी कस्टडी में हैं।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article