बिहार के पश्चिम चंपारण में नौ लोगों की जान लेने वाले एक आदमखोर बाघ का काम आखिरकार तमाम कर दिया गया। शनिवार (आठ अक्टूबर, 2022) को उसे गोली मारकर ढेर कर दिया गया। पर क्या आप जानते हैं कि एक जानवर के आदमखोर बन जाने के क्या मायने हैं, वह कैसे इस स्थिति में पहुंच जाता है? आइए, समझते हैं वजहें:
दरअसल, 'आदमखोर' शब्द अरबी के 'आदम' और फारसी के 'खोर' शब्द से मिलकर बना है। इसका मतलब 'आदमी को खाने वाला' से होता है, जबकि समानार्थी शब्दों की बात करें तो ये नरभक्षी, मनुष्यभक्षी या मानुषाशी हैं। सरल तरीके से समझें तो 'आदमखोर' शब्द का अर्थ उस व्यक्ति के लिए किया जाता है, जो इंसान को खाता हो या मानव को अपना आहार बना लेता हो।
अब सवाल आता है कि ये किन स्थितियों में आदमखोर हो जाते हैं। कहा जाता है कि एक बार मुंह में इंसानी खून लग जाने के बाद ये इसके आदी से हो जाते हैं। भूख पर वे अपने अन्य शिकारों के बजाय इंसान को ढूंढने लगते हैं। वैसे, यह भी माना जाता है कि जब इन जानवरों को शिकार नहीं मिलता तब भी वे आदमखोर हो जाते हैं।
वैसे, बाघ को लेकर आम राय है कि वह घायल-चोटिल होने या फिर बूढ़ा होने पर इंसान को अपना शिकार बनाता है। पटना के चिड़ियाघर के वेटनरी अफसर रह चुके डॉ.अजीत कुमार के हवाले से 'डीबी' की रिपोर्ट में बताया गया, खाने या फिर जंगल की कमी के चलते बाघ आदमखोर बन जाते हैं। यही सबसे बड़ा कारण है।
आदमखोर हो जाने के बाद वे जंगल से बाहर निकल आते हैं और सटे और नजदीकी इलाकों में अपना कहर ढाने लगते हैं। ये इस दौरान इंसानों ही नहीं बल्कि कई बार मवेशियों को भी अपना टारगेट बना लेते हैं।
