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कौन होगा ममता बनर्जी का उत्तराधिकारी? खुद कर दिया ये बड़ा खुलासा

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद उनकी जगह कौन लेगा? आसान शब्दों में कहा जाए, तो ममता दीदी का उत्तराधिकारी कौन होगा? उन्होंने खुद इसका जवाब दिया है। एक निजी चैनल के इंटरव्यू में ममता ने कहा कि मेरे उत्तराधिकारी के बारे में पार्टी फैसला करेगी, मैं नहीं।

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ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

Photo : Twitter

Who will be Mamata Banerjee's Successor: तृणमूल कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेताओं और युवा गुट में जारी संघर्ष के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि उनके उत्तराधिकारी के बारे में कोई भी निर्णय उनकी जगह पार्टी नेतृत्व द्वारा सामूहिक रूप से किया जाएगा। एक निजी बंगाली समाचार चैनल के साथ एक विशेष साक्षात्कार में बनर्जी ने व्यक्तिगत प्रभुत्व की धारणाओं को खारिज किया और कहा, ‘‘मैं पार्टी नहीं हूं; हम पार्टी हैं। यह एक सामूहिक परिवार है, और निर्णय सामूहिक रूप से किए जाएंगे।’’

ममता बनर्जी का उत्तराधिकारी कौन होगा?

अपने संभावित उत्तराधिकारी के बारे में पूछे जाने पर बनर्जी ने सवाल को टालते हुए जवाबी सवाल किया, ‘‘आपका उत्तराधिकारी कौन है?’’ उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक अनुशासित पार्टी है, जहां कोई भी व्यक्ति शर्त निर्धारित नहीं करेगा। बनर्जी ने कहा, ‘‘पार्टी तय करेगी कि लोगों के लिए सबसे अच्छा क्या है। हमारे पास विधायक, सांसद, बूथ कार्यकर्ता हैं, यह एक संयुक्त प्रयास है।’’

युवा पीढ़ी या अनुभवी नेता, कौन प्राथमिक?

युवा पीढ़ी या अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता देने के बारे में जारी बहस पर बनर्जी ने संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखते हुए कहा, ‘‘हर कोई महत्वपूर्ण है। आज का नवागंतुक कल का वरिष्ठ होगा।’’

तृणमूल कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर उत्तराधिकार की कोई योजना घोषित नहीं की है। ममता बनर्जी की टिप्पणी उनके प्रति वफादार माने जाने वाले पुराने नेताओं बनाम अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले अगली पीढ़ी के नेताओं से संबंधित बहस के बीच आई है। अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे हैं।

(इनपुट- भाषा)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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