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कौन है सूचना सेठ? AI एक्सपर्ट, डेटा साइंटिस्ट और CEO... जो बनी अपने ही 4 साल के बेटे की हत्यारिन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 9, 2024, 06:15 PM IST

Who is Suchana Seth: सूचना सेठ ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एस्ट्रो फिजिक्स और प्लाज्मा फिजिक्स की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उसने फिजिक्स में ही अपना मास्टर्स भी किया है। एआई और डेटा साइंस की फील्ड में उसे 12 साल से ज्यादा का अनुभव है।

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सूचना सेठ

Photo : Twitter

Who is Suchana Seth: गोवा पुलिस ने एक महिला को अपने 4 साल के बेटे के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी बीते सोमवार को हुई, जब आरोपी महिला गोवा से टैक्सी लेकर कर्नाटक के चित्रदुर्ग जा रही थी। पुलिस ने महिला के पास एक बैग से बेटे का शव भी बरामद किया है। बताया जा रहा है कि महिला गोवा से कर्नाटक बेटे की लाश को ठिकाने लगाने के लिए आई थी। पुलिस का कहना है कि अभी तक हत्या की वजह पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है, लेकिन यह जरूर कहा जा रहा है कि बेटे को पति से मिलने से रोकने के लिए उसने यह खौफनाक कदम उठाया।

पुलिस ने महिला की पहचान 39 वर्षीय सूचना सेठ के रूप में की है। हालांकि, जब पुलिस ने महिला के बारे में और जानकारी इकट्ठा की तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। जानकारी के मुताबिक, आरोपी महिला बेंगलुरू स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप कंपनी की सीईओ और संस्थापक है।

कौन है सूचना सेठ

सूचना सेठ की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उसने 2020 में द माइंडफुल एआई लैब नाम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी की स्थापना की थी, वह इस कंपनी की सीईओ भी है। 2021 में एआई एथिक्स की 1000 सबसे मेछावी महिलाओं में भी सूचना का नाम शामिल रहा है। महिला एआई एक्सपर्ट और डाटा साइंटिस्ट भी है। इसके अलावा वह हावर्ड यूनिवर्सिटी समेत कई प्रतिष्ठित प्रतिस्थानों में फेलो भी रह चुकी है।

डेटा साइंट में 12 साल से ज्यादा अनुभव

चार साल के बेटे की हत्या करने वाली सूचना सेठ ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एस्ट्रो फिजिक्स और प्लाज्मा फिजिक्स की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उसने फिजिक्स में ही अपना मास्टर्स भी किया है। एआई और डेटा साइंस की फील्ड में उसे 12 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह बर्कमैन क्लेन सेंटर, बोस्टर, मैसाचुसेट्स जैसी जगहों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का काम कर चुकी है। लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उनके पास संस्कृत में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी है और उन्होंने पाठ्यक्रम में पहला स्थान हासिल किया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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