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Suchana Seth: इंस्टाग्राम पर बेटे की फोटो के साथ आखिरी पोस्ट...,खून की प्यासी मां ने पहले ही जाहिर किए थे मंसूबे!

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 9, 2024, 04:51 PM IST

Suchana Seth: सूचना सेठ ने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर पहली और आखिरी बार अपने बेटे की तस्वीर पोस्ट की थी। इसके करीब तीन महीने बाद उसने अपने 4 साल के मासूम बेटे को मौत के घाट उतार दिया।

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सूचना सेठ का आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट

Photo : Twitter

Suchana Seth: बेंगलुरू स्थित AI कंपनी द माइंडफुल एआई लैब की CEO सूचना सेठ ने अपने बेटे की हत्या से तीन महीने पहले इंस्टाग्राम पर आखिरी पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उसने फिश टैंक के साथ अपने बेटे की तस्वीर भी फोटो भी पोस्ट की थी, जिसमें सूचना सेठ ने #WhatwillHappen लिखा था। सोमवार को जब सूचना सेठ को 4 साल के बेटे की लाश के साथ गिरफ्तार किया तो यह पोस्ट वायरल हो गया।

दिलचस्प बात यह है कि सूचना सेठ ने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर पहली और आखिरी बार अपने बेटे की तस्वीर पोस्ट की थी। इसके करीब तीन महीने बाद उसने अपने 4 साल के मासूम बेटे को मौत के घाट उतार दिया। जानकारी के मुताबिक, गोवा पुलिस ने उसे कर्नाटक से गिरफ्तार कर मंगलवार को पणजी कोर्ट में पेश किया, जहां से सूचना सेठ को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

सोमवार को हुई थी गिरफ्तारी

बता दें, गोवा पुलिस ने सोमवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग से सूचना सेठ को गिरफ्तार किया था। वह गोवा से टैक्सी कर चित्रदुर्ग पहुंची थी। पुलिस ने उसके पास एक बैग भी बरामद किया, जिसमें बेटे की लाश थी। अभी तक हत्या के सही कारण का पता नहीं लग पाया है, लेकिन यह बताया जा रहा है कि सूचना सेठ का अपने पति के साथ तलाक का केस चल रहा है और उसने बेटे को पति से मिलने से रोकने के लिए इस खौफनाक घटना को अंजाम दिया। उत्तरी गोवा के एसपी निधिन वलसन ने बताया कि सूचना सेठ के पति वेंकट रमन इंडोनेशिया में रहते हैं, उनको घटना के बारे में सूचित किया गया है और वह भारत वापस आ रहे हैं।

6 जनवरी को पहुंची थी गोवा

सूचना सेठ अपने बेटे के साथ 6 जनवरी को गोवा पहुंची थी। यहां उसने केंडोलिम इलाके में एक सर्विस अपार्टमेंट में चेक इन किया। 7-8 जनवरी की मध्यरात्रि को उसने चेक आउट करने के लिए कहा। उसने होटल स्टाफ से बेंगलुरू जाने के लिए टैक्सी का इंतजाम करने को कहा। हालांकि, स्टाफ ने सुझाव दिया कि वह टैक्सी के बचाय फ्लाइट से जाएं, लेकिन सूचना सेठ टैक्सी से जाने की बात पर अड़ी रहीं। स्टाफ ने टैक्सी का इंतजाम कर दिया, जिसके बाद सोमवार देर रात करीब 1 बजे वह अकेले ही होटल से बाहर निकली। बाद में, सफाई के दौरान, हाउसकीपिंग स्टाफ को उसके कमरे में खून के धब्बे मिले, जिसके तुरंत बाद गोवा पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया गया।

ऐसे आई गिरफ्त में

हाउस कीपिंग स्टाफ ने पुलिस को यह भी बताया कि सूचना सेठ अपने 4 साल के बेटे के साथ यहां पहुंची थी। हालांकि, जब वह वापस लौटी तो बेटा उसके साथ नहीं था। इसके बाद पुलिस ने सूचना सेठ को फोन कर खून के धब्बे और बेटे के बारे में पूछा, जिसके बाद उसने बताया कि उसके पीरियड्स की वजह से कमरे में खून के धब्बे लगे और उसका बेटा उसके दोस्त के घर पर है। हालांकि, पुलिस को उसकी बताई कहानी पर विश्वास नहीं और और अधिकारियों ने टैक्सी ड्राइवर को नजदीकी पुलिस स्टेशन जाने को कहा। इधर, गोवा पुलिस की एक टीम भी महिला के पीछे भेजी गई। पुलिस ने जब महिला के बैग को चेक किया तो उसमें बेटे का शव बरामद हो गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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