India-UK Trade Deal : भारत ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) के तहत ब्रिटेन के लिए पहली ज्वेलरी निर्यात खेप रवाना कर दी है। विदेश वाणिज्य विभाग ने इस ऐतिहासिक खेप के रवाना होने की जानकारी दी है। यह पहली बार है जब भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग को इस समझौते के तहत ब्रिटेन के बाजार में जीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा। सरकार और उद्योग को उम्मीद है कि इससे अगले तीन वर्षों में ब्रिटेन को भारत का ज्वेलरी निर्यात तीन गुना से ज्यादा बढ़ सकता है।
पहली खेप रवाना
वाणिज्य पहली खेप में करीब 1 करोड़ डॉलर (10 मिलियन डॉलर) मूल्य के सोने, हीरे, चांदी और प्लैटिनम के आभूषण शामिल हैं। यह खेप देश के छह शहरों के 30 से अधिक निर्यातकों द्वारा भेजी गई है। इसी अवसर पर मुंबई, सूरत, जयपुर, चेन्नई और कोलकाता में भी प्रतीकात्मक फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम आयोजित किए गए।
नहीं लगेगी 4% तक की इम्पोर्ट ड्यूटी
भारत-ब्रिटेन CETA लागू होने के साथ ही भारतीय ज्वेलरी पर ब्रिटेन में लगने वाली 4% तक की आयात शुल्क समाप्त हो जाएगी। इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियां अब ब्रिटेन के बाजार में दूसरे देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत पर अपने उत्पाद बेच सकेंगी। ब्रिटेन का ज्वेलरी आयात बाजार करीब 4 अरब डॉलर का है और भारत इस अवसर का बड़ा फायदा उठाना चाहता है।
2.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है निर्यात
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के मुताबिक फिलहाल भारत का ब्रिटेन को जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात लगभग 754 मिलियन डॉलर है। CETA के बाद इसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर करीब 2.5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। उनके मुताबिक इससे निर्यातकों, एमएसएमई, कारीगरों और डिजाइनरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और भारत की वैश्विक ज्वेलरी हब के रूप में स्थिति और मजबूत होगी।
किन उत्पादों को मिलेगा फायदा?
इस समझौते से कई श्रेणियों के ज्वेलरी उत्पादों को लाभ मिलेगा। इनमें सोने के आभूषण, हीरे के आभूषण, चांदी के आभूषण, प्लैटिनम ज्वेलरी, रंगीन रत्नों वाली ज्वेलरी,
मोती और लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी का निर्यात बढ़ेगा। इसकी वजह से भारत के प्रमुख ज्वेलरी निर्माण केंद्रों को सीधा फायदा मिलेगा। इनमें सूरत, मुंबई, जयपुर, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद और त्रिशूर प्रमुख हैं।
MSME और कारीगरों के लिए भी नए अवसर
CETA केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है। समझौते में सेल्फ-सर्टिफिकेशन, आसान रूल्स ऑफ ओरिजिन और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। इससे कारोबार करना आसान होगा और छोटे निर्यातकों, एमएसएमई, कारीगरों तथा डिजाइनरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और भारत की वैल्यू-एडेड ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
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