पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल गुरुवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक गुरुद्वारे के अंदर चाकू के हमले में घायल हो गए।आरोपी की पहचान 62 साल के जसपाल सिंह के तौर पर हुई है, जो मूल रूप से पुणे के रहने वाले हैं। नांदेड में पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को लेकर पुलिस ने अहम जानकारी दी है।
नांदेड के पुलिस अधीक्षक निलाभ रोहन ने बताया कि हमले के बाद आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।
जसपाल सिंह को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया
जसपाल सिंह काफी दिनों से नांदेड़ के पास मुगत में माता साहिब गुरुद्वारे में सेवा कर रहे थे। उन्होंने कथित तौर पर बादल पर कृपाण से हमला किया, जब SAD प्रमुख गुरुद्वारे के अंदर थे। जसपाल सिंह को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया और फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। उनके मकसद के बारे में और जानकारी का इंतजार है।
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जसपाल सिंह पेशे से वकील
आरोपी की पहचान 62 वर्षीय जसपाल सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पुणे का रहने वाला बताया जा रहा है और वो पेशे से वकील है और उसने बी कॉम तथा एलएलबी की पढ़ाई की है। बताया जा रहा है कि वह पुणे की अदालत में वकालत भी कर चुका है। पुलिस के मुताबिक, जसपाल सिंह पिछले करीब दो वर्षों से नांदेड के पास मुगट स्थित मातासाहिब गुरुद्वारा में सेवा कर रहा था। आज सुखबीर सिंह बादल गुरुद्वारे में दर्शन के बाद बाहर निकल रहे थे, तभी आरोपी ने उन पर हमला कर दिया।
पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है
हमले के बाद आरोपी को तुरंत पकड़ लिया गया। पुलिस अधीक्षक निलाभ रोहन ने बताया कि एटीएस, आईबी और नांदेड पुलिस की संयुक्त टीम मामले की जांच कर रही है। फिलहाल सुखबीर सिंह बादल की तबीयत ठीक बताई जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और हमले के पीछे आरोपी का मकसद क्या था, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।
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बादल को पहले भी 2024 में निशाना बनाया गया था
यह पहली बार नहीं है जब सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ है। दिसंबर 2024 में, बब्बर खालसा इंटरनेशनल के पूर्व उग्रवादी नारायण सिंह चौड़ा ने कथित तौर पर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार के पास बादल पर गोली चलाई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने हमलावर को काबू में कर लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। उस समय बादल मंदिर के प्रवेश द्वार पर 'सेवादार' की ड्यूटी कर रहे थे। अकाल तख्त ने पंजाब में SAD सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई कथित गलतियों के लिए उन्हें 'तनखाह' यानी धार्मिक सजा सुनाई थी।
