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Tata Trusts में भरोस का संकट! श्रीनिवासन के पत्र पर टाटा ट्रस्ट्स ने फाइल किया कैविएट

टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन के लैटर के बाद टाटा ग्रुप को संभालने वाले 7 ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर के पास कैविएट दाखिल किया है। श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट्स के गवर्नेंस को लेकर सवाल उठाया है।

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टाटा ट्रस्ट्स ने फाइल किया कैविएट

Tata Trusts Vs Tata Sons : देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने को चलाने वाली टाटा सन्स में फिलहाल वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। इस लड़ाई में एक तरफ इस समूह के असली मालिक यानी टाटा ग्रुप के 7 ट्रस्ट हैं। दूसरी तरफ उनके ट्रस्टी, टाटा सन्स के बोर्ड मेंबर और शेयरहोल्डर हैं। फिलहाल, इस लड़ाई में सर दोराबजी टाटा स्ट्रस्ट (SDTT) के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने नया मोर्चा खोल दिया है।

श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को एक पत्र लिखकर SDTT सहित टाटा के अन्य ट्रस्टों पर गवर्नेंस से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल इस मामले में टाटा के 7 ट्रस्टों ने चैरिटी कमिश्नर के पास एक कैविएट फाइल की है। Caveat का मतलब है कि इन ट्रस्ट्स के खिलाफ कोई आदेश पास करने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।

श्रीनिवासन ने क्या किया?

श्रीनिवासन ने अपने पत्र में Tata Group कों संभालने वाली कंपनी टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट्स के दखल पर सवाल उठाए हैं। इसे गवर्नेंस से जुड़ा मुद्दा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रस्ट के टैक्स फ्री स्टेटस और Tata Sons के प्रशासन को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से इस मामले में जांच करने की मांग की है।

कौन से ट्रस्ट ने कैविएट दाखिल की?

कैविए दाखिल करने वाले 7 ट्रस्ट में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT), सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT), JRD टाटा ट्रस्ट, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, RD टाटा ट्रस्ट और सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट शामिल हैं। दो सेट्स में दाखिल कैविएट में एक नोएल टाटा (Noel Tata) के नाम से और दूसरी नेविल टाटा (Neville Tata) के नाम से। नोएल टाटा इन सातों ट्रस्ट्स के बोर्ड में हैं, जबकि नेविल टाटा इनमें से चार ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं।

नोएल और नेविल टाटा की नियुक्ति पर सवाल?

श्रीनिवासन ने SDTT में ट्रस्टी की नियुक्ति और उनके बरकरार रखने पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में नोएल टाटा की स्थायी ट्रस्टी के तौर पर नियुक्ति और नेविल टाटा की नियुक्ति की परिस्थितियों पर भी सवाल किए गए हैं। उन्होंने ट्रस्ट के कंपोजिशन और गवर्नेंस की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही जांच के नतीजों के आधार पर ट्रस्टी के सस्पेंशन या रिमूवल जैसी कार्रवाई की मांग भी की गई है। इसके साथ ही श्रीनिवासन ने यह भी कहा है कि SDTT के चेयरमैन नोएल टाटा की उन ट्रस्ट के डिसीजन में भूमिका सीमित की जानी चाहिए, जिनका संबंध टाटा सन्स से है। उन्होंने कुछ टाटा सन्स बोर्ड मामलों में नोएल टाटा के वोटिंग राइट्स को लेकर भी दिशानिर्देश देने की मांग की है। इसके साथ ही जब तक जांच पूरी नहीं होती, SDTT के ट्रस्टी कंपोजिशन में याथास्थिति बनाए रखने और किसी भी नई नियुक्ति या पुर्नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है।

टैक्स फ्री स्टेटस पर उठे सवाल

शिकायत में Tata Trusts के टाटा सन्स की व्यापारिक गतिविधियों से कमाई करने की स्थिति और टाटा ट्रस्टस के टैक्स फ्री स्टेटस पर भी सवाल उठाए गए हैं। श्रीनिवासन ने रजिस्टर्ड नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन की व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए पूछा है कि Tata Trusts की Tata Sons में हिस्सेदारी और उससे जुड़ी गतिविधियों का उनकी टैक्स फ्री स्टेटस पर क्या असर पड़ सकता है।

नॉमिनी डायरेक्टर के अधिकारों पर भी विवाद

शिकायत का एक और अहम हिस्सा नॉमिनी डायरेक्टर की स्वतंत्रता से जुड़ा है। श्रीनिवासन ने आरोप लगाया है कि SDTT ने एक सर्कुलर के जरिए Tata Sons की प्रस्तावित लिस्टिंग से जुड़े मामले में उनकी भागीदारी और वोटिंग को सीमित करने की कोशिश की गई है। उनके मुताबिक, ऐसा कदम नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर उनके स्वतंत्र फैसले को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर उन्होंने ट्रस्ट के प्रशासन और गवर्नेंस की जांच किए जाने की मांग की है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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