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भारत के समक्ष खतरा...आचार समिति ने महुआ मोइत्रा को दोषी ठहराने के पीछे दी यह वजह, जानिए क्या कहा

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Nov 10, 2023, 12:09 AM IST

मोइत्रा ने समिति के समक्ष और बाहर अपनी टिप्पणियों में यह स्वीकार तो किया है कि हीरानंदानी ने उनके लॉग-इन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल किया था, हालांकि उन्होंने इसके लिए किसी प्रकार के ‘लेन-देन’ को खारिज किया है। लोकसभा की आचार समिति ने बृहस्पतिवार को मोइत्रा को सदन से बर्खास्त करने की सिफारिश की।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

लोकसभा की आचार समिति ने व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के साथ अपने ‘लॉग-इन क्रेडेंशियल’ साझा करने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को दोषी ठहराने के लिए अन्य राष्ट्रों की साइबर एजेंसियों एवं प्रतिनिधियों (स्टेट एक्टर्स) तथा गैर-सरकारी संगठनों एवं कंपनियों से जुड़े साइबर अपराधियों (नन-स्टेट एक्टर्स) से भारत के समक्ष खतरों का हवाला दिया है।

कमेटी ने इसके साथ ही कहा है कि वह (हीरानंदानी) दुबई के अधिकृत निवासी हैं और उनके करीबी रिश्तेदार विदेशी नागरिक हैं। एक सूत्र के अनुसार समिति ने अपने निष्कर्ष में कहा है, "इससे विदेशी एजेंसियों के लिए संवेदनशील सामग्री के लीक होने का गंभीर खतरा पैदा होता है। समिति ने गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिकॉर्ड किया है कि जुलाई 2019 और अप्रैल 2023 के बीच मोइत्रा का पोर्टल संयुक्त अरब अमीरात से 47 बार संचालित किया गया था।"

ऐसा समझा जाता है कि भाजपा सांसद विनोद कुमार सोनकर की अध्यक्षता वाली समिति ने बृहस्पतिवार को मंजूर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस तरह की घटना से प्रणाली (सिस्टम) गंभीर साइबर हमलों की जद में आ सकती है और संभावित रूप से ऐसी घटना प्रणाली को पूरी तरह से अक्षम कर सकती है, जिससे भारत की संसद का कामकाज बाधित हो सकता है।

सूत्रों ने कहा कि ऐसे तत्व प्रणाली में ऐसी चीजें डाल सकते हैं जो झूठे दस्तावेज या फर्जी आख्यान के जरिये राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। समिति को बताया गया कि पोर्टल पर सांसदों को पहले से ही भेजे गये मसौदा विधेयक सहित कई दस्तावेज उपलब्ध होते हैं जो सार्वजनिक डोमेन में नहीं होते हैं। गृह मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में पोर्टल पर पहले से अपलोड किए गए तीन तलाक की प्रथा पर प्रतिबंध और दिवाला सहित 20 विधेयकों का हवाला दिया था।

सूत्रों ने मसौदा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर परिसीमन विधेयक, 2019 को पहले ही प्रसारित कर दिया गया था और इससे ऐसी संवेदनशील सामग्री के लीक होने की संभावना है, जिसका इस्तेमाल ‘राष्ट्रीय सुरक्षा को क्षति पहुंचाने के लिए शत्रु तत्वों’ द्वारा किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि समिति बहुमत के साथ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हीरानंदानी से ‘अवैध पेशकश’ स्वीकार करने के आरोप स्पष्ट रूप से स्थापित हो गए हैं, यह उनके स्वयं के बयान और मीडिया में उनकी टिप्पणियों से पता चलता है।

हालांकि, इन आरोपों के संदर्भ में कि मोइत्रा ने व्यवसायी हीरानंदानी से नकदी भी स्वीकार की थी, समिति ने स्वीकार किया है कि उसके पास आपराधिक जांच करने और धन के लेन-देन का पता लगाने के लिए तकनीकी साधन और विशेषज्ञता नहीं है। सूत्रों ने समिति की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि यह निश्चित रूप से केंद्र सरकार के संस्थानों का काम है। समिति ने सिफारिश की है कि सरकार द्वारा किसी भी ‘लेन-देन’ की समयबद्ध तरीके से जांच की जा सकती है।

मोइत्रा ने समिति के समक्ष और बाहर अपनी टिप्पणियों में यह स्वीकार तो किया है कि हीरानंदानी ने उनके लॉग-इन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल किया था, हालांकि उन्होंने इसके लिए किसी प्रकार के ‘लेन-देन’ को खारिज किया है। लोकसभा की आचार समिति ने बृहस्पतिवार को मोइत्रा को सदन से बर्खास्त करने की सिफारिश की।

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