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पश्चिम बंगाल में कहां हुई चूक, चुनाव के बीच 18 मौतों का जिम्मेदार कौन; 10 प्वाइंट में हिंसा की पूरी इनसाइड स्टोरी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 9, 2023, 10:20 AM IST

West Bengal Poll Violence: पश्चिम बंगाल में शनिवार को शुरू हुई वोटिंग के बीच दहशतगर्दी का ऐसा आलम शुरू हुआ कि देर शाम तक बमबारी, चाकूबाजी, पत्थरबाजी और बैलट बॉक्स लूटे जाने की खबरें आती रहीं। चुनाव के बीच हुई हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में यहां 18 लोगों की मौत हुई।

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पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच हिंसा

Photo : ANI

West Bengal Poll Violence: पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच हुई हिंसा ने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया। देश ने वह सबकुछ देखा, जो शायद कई सालों तक याद रखा जाएगा। लोकतंत्र पर किए गए घावों का दर्द रह-रहकर उठता रहेगा।

दरअसल, चुनाव के बीच हिंसा, बूथ-कैप्चरिंग बीते जमाने की बात हो चुकी थी, लेकिन पश्चिम बंगाल में शनिवार को शुरू हुई वोटिंग के बीच दहशतगर्दी का ऐसा आलम शुरू हुआ कि देर शाम तक बमबारी, चाकूबाजी, पत्थरबाजी और बैलट बॉक्स लूटे जाने की खबरें आती रहीं। चुनाव के बीच हुई हिंसा की अलग- अलग घटनाओं में यहां 12 लोगों की मौत हुई। इससे पहले शुक्रवार शाम को छह लोगों की मौत हुई थी। आइए 10 प्वाइंट में जानते हैं पश्चिम बंगाल हिंस की पूरी इनसाइड स्टोरी...

1. 24 घंटे में 18 मौतें

बीते शुक्रवार शाम से शनिवार शाम यानी 24 घंटे में यहां 18 लोगों की मौत हो गई। इसमें सभी राजनीतिक दलों से हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में 10 टीएमस कार्यकर्ता, तीन बीजेपी, तीन कांग्रेस और दो सीपीआईएम कार्यकर्ता शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के बीच हुई हिंसा की ये वारदात मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, पूर्वी बर्दवान, मालदा, नादिया, उत्तरी 24 परगना, दक्षिण 24 परगना जिले में हुईं।

2. मतदान शुरू होते ही हिंसा

मतदान शुरू होने के बाद दिन के समय में ही मतपेटियों की लूट की खबरें सामने आईं। कूच बिहार जिले के दिनहाटा में, बारविटा सरकारी प्राथमिक विद्यालय के एक बूथ पर मतपेटियों में तोड़फोड़ की गई और मतपत्रों में आग लगा दी गई। बरनाचिना क्षेत्र के एक अन्य बूथ पर, स्थानीय लोगों ने गलत मतदान का आरोप लगाते हुए मतपत्रों के साथ एक मतपेटी को भी आग लगा दी।

3. पुलिस वाहनों को भी नहीं छोड़ा गया

पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा में पुलिस के वाहनों को भी नहीं छोड़ा गया। मुर्शिदाबाद जिले में उपद्रवियों ने एक पुलिस वाहन को ही आग लगा दी।

4. कहां हुई चूक

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव के बीच हुई हिंसा के बाद ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए बीएसएफ ने बड़ा दावा किया गया है। बीएसएफ ने कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने उन बूथों की जानकारी नहीं दी थी, जो संवेदनशील थे।

5. जहां पुलिस की तैनाती वहां हिंसा ज्यादा

रिपोर्ट में सामने आया है कि जहां केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी, उन बूथों पर हिंसा की छिटपुट घटनाएं हुई हैं। हालांकि, जहां राज्य पुलिस बल तैनात था, उन संवदेनशील बूथों पर हिंसा ज्यादा हुई। नतीजतन कई मौतें भी हुईं।

6. कई जगह हुई बमबाजी

पश्चिम बंगाल में कई बूथों पर बमबाजी की भी घटनाएं हुईं। तूफानगंज के एक पोलिंग बूथ पर बम फेंके गई, भाजपा के पोलिंग बजेंट माधव विश्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

7. बैलेट बॉक्स की हुई लूट

कूचविहार में एक युवक ने बैलेट बॉक्स को ही लूट लिया। इसके अलावा दिनहाटा में एक मतदान केंद्र में मतपेटी में आग लगा दी गई। यहां के एक मतदान केंद्र में मतपेटी पानी में फेंक दी गई।

8. भाजपा ने की राष्ट्रपति शासन की मांग

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। हिंसा के खिलाफ उन्होंने कालीघाट तक मार्च निकालने की धमकी दी। उन्होंने चुनावी हिंसा की सीबीआई और एनआईए से जांच कराने की भी मांग की।

9. हो सकता है दोबारा मतदान

हिंसा के बाद कई मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग कराने की मांग है। बंगाल राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) राजीव सिन्हा ने शनिवार को कहा कि पैनल वोटों से छेड़छाड़ की शिकायतों पर गौर करेगा और पर्यवेक्षकों और रिटर्निंग अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद निर्णय लेगा।

10. पांच बजे तक 66.28 प्रतिशत मतदान

राज्य में 73,887 सीटों पर सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ और 5.67 करोड़ लोगों ने लगभग 2.06 लाख उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला किया।हिंसा के बीच शाम पांच बजे तक 66.28 प्रतिशत मतदान हुआ।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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