पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC की रैली कोलकाता में निकाली गई। यह रैली इलेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए है। आज 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का दूसरा चरण शुरू होने के साथ ही, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC नेताओं ने इस प्रक्रिया के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
बता दें कि तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ मुख्यमंत्री ममता ने रेड रोड स्थित बीआर अंबेडकर की प्रतिमा से रैली शुरू की।यह मार्च रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर जोरासांको ठाकुर बाड़ी पर समाप्त होगा।
TMC ने इस प्रक्रिया को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग द्वारा की गई 'चुपचाप अदृश्य हेराफेरी' करार दिया है।हजारों की संख्या में तृणमूल समर्थक रैली मार्ग पर उमड़ पड़े, वे पार्टी के झंडे लहरा रहे थे, नारे लगा रहे थे और रंग-बिरंगे पोस्टर लिये हुए थे।अपनी विशेष पहचान सफेद सूती साड़ी और चप्पल पहने बनर्जी ने रैली का नेतृत्व किया और बीच-बीच में बालकनी और फुटपाथों पर खड़े लोगों का अभिवादन करने के लिए रुकीं।
मुख्यमंत्री के बाद अभिषेक बनर्जी भी आए और उन्होंने भीड़ की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री भी थे।
SIR को लेकर काफी विरोध हो रहा है
बता दें कि पश्चिम बंगाल सहित 11 अन्य राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मंगलवार को शुरू हुआ। चुनाव आयोग के बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) ने गणना फॉर्म वितरित करने और मतदाताओं की जानकारी एकत्रित करने के लिए घरों का दौरा करना शुरू कर दिया है। इसे लेकर काफी विरोध हो रहा है।
चार नवंबर से चार दिसंबर तक घर-घर जाकर गणना की जाएगी
वहीं तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कड़े विरोध के बीच मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया मंगलवार को शुरू हो गई और प्राधिकारियों ने कहा कि बूथ स्तर के अधिकारी लोगों को आवश्यक गणना प्रपत्र भरने में मार्गदर्शन देंगे। तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत चार नवंबर से चार दिसंबर तक घर-घर जाकर गणना की जाएगी।
इस बीच, द्रमुक ने एसआईआर के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में इसे 'वास्तव में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी)' करार दिया है और इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। सत्तारूढ़ दल ने एसआईआर पर निर्वाचन आयोग की 27 अक्टूबर, 2025 की अधिसूचना को रद्द करने का अनुरोध किया है।
