Waqf Amendment bill : वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार को संसद में पेश होगा। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में इस बिल को सदन में पेश करने का फैसला किया गया। बिल को दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक पेश किए जाने के बाद इस पर चर्चा होगी। सूत्रों का कहना है कि सरकार का इरादा बिल पर चर्चा कराए जाने के बाद इसे पारित करने पर है। सूत्रों का यह भी कहना है कि संसद में इस विधेयक को पेश करने से पहले भाजपा के वरिष्ठ मंत्री इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। बता दें कि संसद का बजट सत्र का समापन चार अप्रैल को हो रहा है। विधेयक को कानून बनने के लिए इस संसद के दोनों सदनों में पारित होना जरूरी है।
मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों का प्रबंधन करता है वक्फ
दरअसल, वक्फ संशोधन विधेयक के जरिए सरकार वक्फ बोर्ड में सुधार लाने के लिए उसमें पारदर्शिता लाना चाहती है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय के धार्मिक एवं चैरिटेबल संपत्तियों का देखरेख और उनका प्रबंधन करता है। हालांकि, मौलवी एवं वक्फ बोर्ड से जुड़े नेता इस संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां भी इसके खिलाफ हैं। राजनीतिक दलों का कहना है कि उनके सुझावों को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने विधेयक को असंवैधानिक एवं मुसलमानों के खिलाफ बताया है।
'चर्चा के लिए समय बढ़ाने को तैयार'
रीजीजू ने कहा कि विपक्ष को यदि लगता है कि बिल पर चर्चा के लिए समय बढ़ाने की जरूरत है तो सरकार इसके लिए तैयार है। लेकिन अगर वह किसी तरह का बहाना बनाकर चर्चा में भाग नहीं लेंगे तो वह कुछ नहीं कर सकते। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह विधेयक पर चर्चा चाहते हैं। विधेयक पर सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का अधिकार है। देश भी उनके विचारों को जानना चाहता है।
लोगों को गुमराह कर रहे कुछ संगठन-रीजीजू
अल्पसंख्यक एवं संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों पर समाज में अशांति फैलाने तथा इसके प्रावधानों को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। सरकार ने संकेत दिया है कि वह मंगलवार को विभिन्न दलों के नेताओं के साथ विधेयक पेश करने के समय पर चर्चा करेगी। विपक्षी दल इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे असंवैधानिक तथा मुस्लिम समुदाय के हितों के विरुद्ध बता रहे हैं। कई प्रमुख मुस्लिम संगठन इस विधेयक के खिलाफ समर्थन जुटा रहे हैं। इस विधेयक की संसद की संयुक्त समिति ने पड़ताल की थी तथा कई संशोधनों के साथ इसे मंजूरी दी थी।
