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तिनके की तरह नदियों में समा रहे पहाड़, मानसून ने दिखाया रौद्र रूप, बंद हुआ आदि कैलाश मार्ग

Adi Kailash road closed: उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों का बुरा हाल है। यहां भूस्खलन के कारण कई मार्ग बंद हो गए हैं। पिथौरागढ़ जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण हुए भूस्खलन से भारत- चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाला तवाघाट- लिपुलेख सड़क मार्ग तपोवन, दोबाट, कूलागाड़ आदि जगहों पर बंद है।

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आदि कैलाश मार्ग बंद

Adi Kailash road closed: उत्तराखंड में इस बार मानसून ने आते ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पूरे प्रदेश में भारी बारिश का कहर देखने को मिल रहा है। सभी नदियां उफान पर हैं। पहाड़ तिनके की तरह नदियों में समा रहे हैं, तो कहीं सड़कों पर गिरा मलबा मार्गों को बंद कर रहा है। आदि कैलाश यात्रा मार्ग तीन-चार दिनों से बंद है। इसके चलते तवाघाट में फंसे 23 यात्रियों को कोतवाली धारचूला पुलिस, एसएसबी व एनडीआरएफ टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

पिथौरागढ़ जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण हुए भूस्खलन से भारत- चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाला तवाघाट- लिपुलेख सड़क मार्ग तपोवन, दोबाट, कूलागाड़ आदि जगहों पर बंद है। इसके कारण श्री आदि कैलाश यात्रा से वापस आ रहे 23 यात्री तीन-चार दिनों से तवाघाट में फंसे हुए थे।

यात्रियों के फंसे होने की सूचना पर पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़, रेखा यादव के आदेशानुसार, शनिवार को पुलिस उपाधीक्षक पिथौरागढ़, परवेज अली के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली धारचूला,विजेंद्र शाह एसएसबी व एनडीआरएफ टीम के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाकर मार्ग में फंसे सभी यात्रियों को सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। सभी यात्रियों ने पुलिस, एनडीआरएफ व एसएसबी टीम के इस कार्य की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

1.59 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किये

श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) के अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में अमरनाथ मंदिर में पिछले आठ दिनों में 1.59 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। हालांकि, भारी बारिश के कारण चल रही यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी। लेकिन शनिवार को 7 हजार 500 लोगों ने दर्शन किए, जिससे कुल श्रद्धालुओं की संख्या 1.59 लाख हो गई। अधिकारियों ने बताया, भारी बारिश और फिसलन भरे रास्तों के कारण कल यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। फिर भी 7,500 तीर्थयात्रियों ने पवित्र गुफा मंदिर के अंदर 'दर्शन' किए। 6,145 यात्रियों का एक और जत्था आज जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों में घाटी के लिए रवाना हुआ।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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