उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी, तुरंत प्रभाव से हुआ लागू; जानें इसके मायने
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 26, 2026, 07:56 PM IST
यह अध्यादेश समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड, 2024 में आवश्यक संशोधन करने के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि इसके क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु बनाया जा सके। सीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संशोधन अध्यादेश के जरिए संहिता के विभिन्न प्रावधानों में प्रक्रियागत, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार किए गए हैं।
समान नागरिक संहिता
उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह अध्यादेश समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड, 2024 में आवश्यक संशोधन करने के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि इसके क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु बनाया जा सके। राज्य सरकार के मुताबिक, अध्यादेश को भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत प्रख्यापित किया गया है।
प्रक्रियागत और प्रशासनिक सुधार
सीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संशोधन अध्यादेश के जरिए संहिता के विभिन्न प्रावधानों में प्रक्रियागत, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करने में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना है।
सरकार का कहना है कि संशोधनों से न केवल कानून के पालन की प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि इसके तहत पंजीकरण, रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
27 जनवरी 2025 को लागू की गई थी यूसीसी
उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई थी। इसके तहत राज्य के सभी निवासियों पर धर्म, जाति या समुदाय से अलग-विवाह, तलाक, संपत्ति, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में एक समान कानून लागू करने का प्रावधान है। बता दें कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां यूसीसी लागू की गई है।
सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत कर सामाजिक समानता, पारदर्शिता और न्याय को मजबूत करना है। इसके तहत विवाह और उत्तराधिकार से जुड़े नियम सभी समुदायों के लिए समान होंगे।
ये प्रावधान भी है
यूसीसी के प्रावधानों में महिलाओं को संपत्ति और विरासत में पुरुषों के बराबर अधिकार दिए गए हैं। साथ ही, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और बिना पंजीकरण साथ रहने पर दंड का प्रावधान रखा गया है। कानून के तहत सभी धर्मों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु समान तय की गई है लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष। इसके अलावा बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य सरकार ने हर वर्ष 27 जनवरी को ‘यूसीसी दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा भी की है।
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