ULFA-Centre Peace Deal: नॉर्थ ईस्ट का सूबा असम अब उग्रवाद से आगे मुक्त रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां के उग्रवादी समूह यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) का केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ अहम समझौता हुआ है। शुक्रवार (29 दिसंबर, 2023) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने केंद्र और सीएम हेमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के बाद गृह मंत्री ने बताया, "आज मेरे लिए बुहत हर्ष का विषय है कि असम के भविष्य के लिए यह एक सुनहरा दिन है। लंबे समय से असम ने हिंसा झेली है। पूरे नॉर्थ ईस्ट ने हिंसा झेली है। जब से नरेंद्र मोदी पीएम बने हैं (2014 से), तब से दिल्ली और नॉर्थ ईस्ट के बीच की दूरी कम किए जाने के प्रयास हुए हैं।"
बकौल शाह, "मन खोलकर, खुले दिल से सभी के साथ बाचतीत के प्रयास किए गए और उनके (पीएम मोदी) के मार्गदर्शन में उग्रवादमुक्त, हिंसामुक्त और विवादमुक्त नॉर्थ ईस्ट की परिकल्पना लेकर गृह मंत्रालय चलता रहा है। पिछले पांच साल में नौ शांति और सीमा संबंधित समझौते अलग-अलग राज्यों के नॉर्थ ईस्ट में हुए, जिससे उत्तर पूर्व के बड़े हिस्से में शांति स्थापित हुई है।"
उन्होंने आगे जानकारी दी, रिकॉर्ड पर नौ हजार से अधिक काडर ने सरेंडर किया और असम की बात करें 85 फीसदी सूबे में से अफस्पा (सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम) को हटाया जा रहा है। आज भारत सरकार, असम सरकार और उल्फा के बीच समझौता हुआ है, जिससे सूबे के सभी हथियारी समूहों की बात को यहीं पर समाप्त करने में हमें सफलता मिली है। यह असम और नॉर्थ ईस्ट की शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अमित भाई ने बताया, "असम लंबे समय तक उल्फा की हिंसा से त्रस्त रहा है। साल 1979 से अब तक 10,000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। हालांकि, असम का सबसे पुराना उग्रवादी संगठन उल्फा हिंसा छोड़ने और संगठन को भंग करने पर सहमत हुआ है। उल्फा के साथ समझौते के तहत असम को बड़ा विकास पैकेज दिया जाएगा। समझौते को पूरी तरह से लागू किया जाए।"
क्या चाहता था उल्फा?
दरअसल, उल्फा की स्थापना सात अप्रैल 1979 को शिवसागर (असम) में युवाओं के समूह ने की थी। इस ग्रुप में परेश बरुआ, अरबिंद राजखोवा, अनूप चेतिया, भूपेन बोरगोहेन, प्रदीप गोगोई, भद्रेश्वर गोहेन और बुधेश्वर गोगोई थे। उल्फा का असल मकसद असम को अलग स्वतंत्र राज्य बनाने के लिए सशस्त्र संघर्ष में शामिल होना था।देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
