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अर्श से फर्श पर टमाटर: दो महीने में 200 रुपये से 3 रुपये पहुंचे दाम, सड़क पर फसल फेंकने को मजबूर किसान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 9, 2023, 02:10 PM IST

Tomato prices Huge decline: टमाटर के भाव अर्श से फर्श पर आ चुके हैं। आंध्र प्रदेश में तो टमाटर 2 से 3 रुपये किलो बिक रहा है। आलम यह है कि दो महीने टमाटर से भरपूर मुनाफा कमाने वाले किसान अब मुसीबत में पड़ गए हैं और फसल को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हैं।

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टमाटर के भाव में भारी गिरावट

Photo : BCCL

Tomato prices Huge decline: अभी दो महीने पहले की ही बात है कि टमाटर के भाव 200 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर पहुंच गए थे। इतनी महंगाई ने आम जनता से लेकर सियासी गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी थी। बड़े-बड़े रेस्टोरेंट और होटलों में भी पकवानों से टमाटर गायब हो गया था। लिहाजा सरकार को टमाटर के दाम नीचे लाने के लिए सब्सिडी देनी पड़ी और जगह-जगह सरकारी स्टॉल भी लगाए गए। जहां, आम जनता को राहत देने के लिए 50 रुपये किलो टमाटर बेचा जा रहा था।

लेकिन, अब टमाटर के भाव अर्श से फर्श पर आ चुके हैं। आंध्र प्रदेश में तो टमाटर 2 से 3 रुपये किलो बिक रहा है। आलम यह है कि दो महीने टमाटर से भरपूर मुनाफा कमाने वाले किसान अब मुसीबत में पड़ गए हैं और फसल को सड़क पर फेंकने के लिए मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि टमाटर के भाव इतना नीचे गिर गए हैं कि उन्हें खेत से मंडी तक ले जाने का भाड़ा तक निकालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में रायलसीमा के कई किसानों ने अपनी उपज सड़कों पर फेंक दी है।

थोक में 10 रुपये से नीचे पहुंची कीमत

टमाटर के भावों में गिरावट का आलम यह है कि कई बाजारों में इसकी थोक कीमतें 10 रुपये से नीचे गिर गई हैं। वहीं खुदरा कीमत 20 से 30 रुपये प्रति किलो के बीच है। अनंतपुर जिले के इप्पेरू के किसान के वन्नूरू स्वामी ने कहा कि टमाटर के दामों में भारी गिरावट के कारण उन्होंने खेद में ही फसल छोड़ दी है। उन्होंने बताया, मैंने तीन एकड़ में टमाटर की फसल लगाई थी, इसमें एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आया था, लेकिन अब लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया, कई किसानों में माल ढुलाई का भाड़ा भी अपनी जेब से भरा है। इसलिए उन्होंने इस सीजन के लिए अपनी फसल खेत में छोड़ने का फैसला किया है।

कई जगह 400 रुपये में भी बिका था टमाटर

दो महीने पहले जब टमाटर की कीमतें बढ़ीं थीं तो कई जगह टमाटर के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। टमाटर की कीमत रिटेल में 250 से लेकर 400 रुपये तक पहुंच गई थी, जिससे हाहाकार मच गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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