TMC Rebel: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा सियासी घमासान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि तृणमूल के बागी खेमे में अब कुल 22 सांसद शामिल हो गए हैं। उनके अनुसार, जल्द ही दो और सांसद इस गुट का हिस्सा बनने वाले हैं, जिससे लोकसभा में यह संख्या और मजबूत हो जाएगी। बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय और अन्य सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे।
इससे पहले कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) ने बताया कि वे और उनके साथी सांसद इस मामले को लेकर सोमवार को दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य अध्यक्ष से इस बागी समूह को लोकसभा में एक 'अलग गुट' के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की मांग करना है। हालांकि, दस्तीदार ने उन दो नए सांसदों के नामों का खुलासा अभी नहीं किया है, जिनके शामिल होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके नाम औपचारिक रूप से जुड़ने के बाद ही सार्वजनिक किए जाएंगे।
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क्या भाजपा को समर्थन देगी ममता की पार्टी का बागी धड़ा?
इस घटनाक्रम के पीछे की मुख्य वजह राज्य की राजनीति में पिछले चार-पांच सालों से चल रही असहमति बताई जा रही है। दस्तीदार का कहना है कि जो सांसद लंबे समय से बंगाल की मौजूदा स्थिति और पार्टी की कार्यशैली से असहज थे, वे अब एक मंच पर आ गए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी यह चर्चा जोरों पर थी कि यह बागी समूह केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दे सकता है।
दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और कानूनी दांव-पेंच
विवाद की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज भी सामने आया था। इसमें शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, दीपक अधिकारी (देव), यूसुफ पठान और रचना बनर्जी जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। इन सभी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग गुट बनाने का अनुरोध किया है।
हालांकि, लोकसभा सचिवालय की ओर से अभी तक इस पत्र की प्राप्ति या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस दिल्ली दौरे में शामिल होने की संभावना कम है, क्योंकि वह राज्य में सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। तृणमूल के अंदर की यह उथल-पुथल अब ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि लोकसभा में पार्टी की ताकत का एक बड़ा हिस्सा बगावत के सुर बुलंद कर चुका है। आने वाले दिनों में अध्यक्ष का फैसला इस गुट की सियासी किस्मत तय करेगा।
