Abhishek Banerjee Forged Signature Case: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय 'फर्जी हस्ताक्षर' का एक बड़ा मामला गरमाया हुआ है। इस मामले की जांच के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और पार्टी नेता कुणाल घोष से सीआईडी (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) पूछताछ कर रही है। रविवार को अभिषेक बनर्जी को दोपहर के समय और कुणाल घोष (Kunal Ghosh) को दोपहर बाद पूछताछ के लिए बुलाया गया। इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी से सीआईडी मुख्यालय में करीब साढ़े पांच घंटे तक लंबी पूछताछ की जा चुकी है।
कहां फंसा पेंच?
20 मई को अभिषेक बनर्जी ने जो अटेंडेंस शीट सौंपी, उसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे। विवाद तब शुरू हुआ जब 27 मई को टीएमसी के ही दो विधायकों ने स्पीकर से शिकायत कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि 6 मई को ऐसी किसी नियुक्ति का कोई प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ था और उन्होंने 19 मई को केवल अटेंडेंस बुक पर दस्तखत किए थे।
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शिकायत में कहा गया कि यह प्रस्ताव फर्जी तरीके से तैयार किया गया है और इसमें करीब 14 विधायकों के हस्ताक्षर 'ब्लॉक लेटर्स' (बड़े अक्षरों) में हैं, जो संदिग्ध हैं। सीआईडी इस मामले में अब तक 13 विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है। वहीं, दूसरी तरफ टीएमसी ने बगावती रुख अपनाने वाले अपने दो विधायकों, संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। फिलहाल सीआईडी इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि इन हस्ताक्षरों के पीछे असली कहानी क्या है।
क्या है यह पूरा विवाद?
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के कुछ महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों से जुड़ा है। दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक दस्तावेज सौंपा गया था, जिसमें सोवनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (LoP), असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उप-नेता प्रतिपक्ष, और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाने का प्रस्ताव था।
अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को जानकारी दी थी कि पार्टी ने यह फैसला 6 मई को हुई ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस विधायी दल की बैठक में लिया था। इसके बाद विधानसभा के प्रधान सचिव ने अभिषेक बनर्जी से इस बैठक का ब्यौरा (मिनट्स) और प्रस्ताव की कॉपी मांगी, जिसमें बैठक में मौजूद विधायकों के हस्ताक्षर हों।
