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न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायत का तंत्र 'मजबूत और प्रभावी', छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में बोले CJI सूर्यकांत

Judges Complaint Mechanism Supreme Court India: छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए न्यायपालिका का आंतरिक तंत्र 'मजबूत' और 'बेहद प्रभावी' है।

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न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायत का तंत्र 'मजबूत और प्रभावी', छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में बोले CJI सूर्यकांत

CJI Surya Kant Ram Jethmalani Memorial Lecture: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों की ओर से विकसित तंत्र 'मजबूत', 'बेहद प्रभावी' और समय पर कार्रवाई करने वाला है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में 'न्याय होता हुआ दिखना चाहिए : कानूनी व्यवस्था के आधार के तौर पर पारदर्शिता और जनता का भरोसा' विषय पर मुख्य भाषण देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सुधार ही नियम होना चाहिए और कोई भी संस्था एक ही स्थिति में बने रहकर न तो टिक सकती है और न ही उस पर गर्व कर सकती है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि अन्य प्रशासनिक सुधारों के संबंध में, खासकर शिकायतों से जिस तरह निपटा जा रहा है, भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों ने जो तंत्र विकसित किया है, वह मजबूत, बेहद प्रभावी और समय पर कार्यवाई करने वाला है।'

'समय-समय पर प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता'

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और हरीश साल्वे, जिन्होंने इस कार्यक्रम में भी अपने विचार रखे, ने प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं, जो 'सार्वजनिक महत्व के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न' हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी संस्था को समय-समय पर प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता हो सकती है और न्यायपालिका भी इसका अपवाद नहीं है।

जेठमलानी ने अपने संबोधन में उस विवाद का जिक्र किया था, जो पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर नकदी मिलने के आरोपों से जुड़ा था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'हम बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार करते हैं कि सुधार ही नियम होना चाहिए। कोई भी संस्था एक ही स्थिति में बने रहकर न तो टिक सकती है और न ही उस पर गर्व कर सकती है। लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे भी होते हैं, जिन पर सार्वजनिक मंच से प्रतिक्रिया देना सही नहीं होता।' उन्होंने कहा कि कोई न्यायाधीश, चाहे वह अंतरिम आदेश दे रहा हो या अंतिम फैसला, हर चरण पर शिकायत को आमंत्रित करेगा।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, '...यह बहुत ही गंभीर और बहस वाला मुद्दा है कि क्या उन सभी शिकायतों को किसी मंच या वेबसाइट पर लाया जाना चाहिए, या फिर कोई बहुत मजबूत आंतरिक तंत्र होना चाहिए, जो पूरी निष्पक्षता, बिना किसी पूर्वाग्रह और बहुत जिम्मेदारी के साथ उन शिकायतों को निपटाए।' उन्होंने कहा, 'मैं भरोसा दिला सकता हूं कि ऐसा तंत्र अच्छी तरह से स्थापित है, लेकिन इसमें हमेशा सुधार और गुणवत्ता में बेहतरी की गुंजाइश लगातार बनी रहती है।'

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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