TMC MP Dola Sen Demands FIR Against Rebel Faction: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC Rebellion) इस समय अंदरूनी कलह और बगावत के दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर उभरे एक नए बागी गुट ने खुद को 'असली तृणमूल' बताना शुरू कर दिया है, जिससे नाराज होकर TMC सांसद डोला सेन ने कानूनी रास्ता अख्तियार कर लिया है। डोला सेन ने कोलकाता के प्रगति मैदान थाने में बागी नेताओं के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से झूठी सूचनाएं फैलाने के आरोप में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
अपनी शिकायत में डोला सेन ने पुलिस से भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज करने और इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। उन्होंने पुलिस से बागी गुट द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को तुरंत जब्त करने का भी आग्रह किया है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) की अगुवाई वाले इस बागी गुट ने कोलकाता में पूर्व पार्षदों के साथ एक बड़ी बैठक की।
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बागी गुट ने TMC के लिए एक नए नेतृत्व ढांचे का किया ऐलान
इस बैठक के बाद पूर्व पार्षद देबलीना बिस्वास ने मीडिया को बताया कि 22 जून को पार्टी के एक नए संविधान का मसौदा तैयार किया गया था और यह बैठक उसी नए नेतृत्व के बुलावे पर हुई थी, जिसमें पूर्व पार्षदों की समस्याओं पर चर्चा की गई। दरअसल, इस बागी गुट ने तृणमूल कांग्रेस कमेटी के लिए एक नए नेतृत्व ढांचे का ऐलान कर दिया है, जिसमें अरूप रॉय को चेयरमैन बनाया गया है। बागी गुट का दावा है कि उन्हें पार्टी के 80 में से 58 विधायकों का समर्थन हासिल है।
बनाई 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति
उन्होंने एक 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति भी बना ली है, जिसमें फिरहाद हकीम और अरूप विश्वास जैसे बड़े चेहरों को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस गुट का कहना है कि ममता बनर्जी पार्टी में केवल एक 'मेंटर' यानी मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगी। इसके साथ ही, काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) की अगुवाई में 20 TMC सांसदों ने एक अलग पार्टी (NCPI) के साथ विलय की घोषणा भी कर दी है, जिसने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है।
