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तेल खरीदने के रास्ते सीमित करते जा रहे ट्रंप, भारत के लिए अब क्या हैं विकल्प

अभी भारत अपना 80 प्रतिशत से ज्यादा देल 40 से ज्यादा देशों से आयात करता है। ईरान-अमेरिका, इजराइल युद्ध शुरू होने से पहले इसकी बड़ी मात्रा खाड़ी देशों यानी सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर, ओमान से आती थी लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति नहीं हो पा रही है या हो भी रही है तो इसकी मात्रा बहुत कम है।

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Photo : AP
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
Written by: आलोक कुमार राव
Updated Sep 29, 2026, 20:24 IST
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India Oil Import: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक नया हथियार मिल गया है। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर वह अब 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। हाल के वर्षों में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में चीन, भारत और तुर्किये शामिल हैं। यूक्रेन युद्ध जो फरवरी 2022 में शुरू हुआ उसके जारी होने के बाद भारत, रूस से बड़ी मात्रा में क्रूड तेल खरीदता आया है। यह आज भी रुका नहीं है। चूंकि रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप ने इससे पहले जो टैरिफ लगाए थे उसे यूएस की सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बताकर खारिज कर दिया था .और ट्रंप को फटकार लगाई अलग से लेकिन इस बार मामला कानूनी है। रूसी तेल खरीदने पर लगाने वाला बिल यूएस कांग्रेस से पारित हुआ है और ट्रंप ने इस पर दस्तखत भी कर दिए हैं। यानी यह कानून बन गया है। ट्रंप यदि अब टैरिफ लगाते हैं तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

40 से ज्यादा देशों से तेल आयात करता है भारत

अभी भारत अपना 80 प्रतिशत से ज्यादा देल 40 से ज्यादा देशों से आयात करता है। ईरान-अमेरिका, इजराइल युद्ध शुरू होने से पहले इसकी बड़ी मात्रा खाड़ी देशों यानी सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर, ओमान से आती थी लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति नहीं हो पा रही है या हो भी रही है तो इसकी मात्रा बहुत कम है। दूसरा, सऊदी अरब से तेल मंगाने का एक और रास्ता था बाब अल मंदेब। लेकिन अब हूतियों के हमलों के बाद लाल सागर का यह रास्ता भी करीब-करीब बंद हो चुका है। यानी खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति करीब-करीब ठप हो गई है। अभी की यानी 2025 की अगर बात करें तो भारत 30 से 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात किया है। यानी तेल का करीब एक तिहाई हिस्सा वह रूस से खरीद रहा था। यह आपूर्ति यदि नहीं होती है और खाड़ी देशों से भी कच्चा तेल नहीं मिलता है तो तेल को लेकर भारत के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।

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यूएस के कहने पर भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया

अब रूस से तेल खरीदने पर भारत पर ट्रंप 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति न के बराबर है। ऐसे में भारत के सामने तेल खरीदने को लेकर विकल्प बहुत सीमित होते जा रहे हैं और यह सब भारत की वजह से नहीं बल्कि अमेरिका और बहुत हद तक पश्चिमी देशों की वजह से हो रहा है। ईरान पर हमला यदि नहीं हुआ होता तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले की तरह आज भी खुला होता। अमेरिका के ही कहने पर भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया। आपको याद होगा कि यूक्रेन युद्ध जब शुरू हुआ तो बाइडेन प्रशासन ने अतंरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में स्थिरता लाने के लिए भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अनुरोध किया।

भारत का साफ संदेश-किसी दबाव में नहीं आएंगे

इस अनुरोध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया। रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत मास्को से तेल नहीं खरीदता था और अब अमेरिका कह रहा है कि रूस से तेल मत खरीदो। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में नहीं आएगा। अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया में जहां भी सस्ता तेल मिलेगा, वह खरीदेगा। यही नहीं, टैरिफ पर इस बार भारत ने अमेरिका को हिदायत भी दी है। नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि यदि इस बार टैरिफ लगा तो दोनों देशों के आपसी संबंध प्रभावित होंगे। यह पहले की तरह नहीं रह पाएंगे।

तो दूरी की वजह से महंगा पड़ेगा तेल

खास बात यह भी है कि अमेरिका, खाड़ी देशों से तेल खरीदने से भी मना नहीं कर रहा है। खाड़ी देशों सऊदी अरब, यूएई, इराक,कुवैत से भारत तेल खरीद सकता है लेकिन सवाल है कि यहां से तेल आएगा कैसे। रास्ते तो बंद हैं। भारत अगर अमेरिका, कनाडा, वेनेजुएला, ब्राजील, नाइजीरिया और अंगोला से तेल खरीद यदि बढ़ाता भी है तो दूरी की वजह से यह तेल महंगा पड़ेगा और इसकी नियमित आपूर्ति होने में वक्त भी लग सकता है। एक्सपर्ट की राय है कि अमेरिका को दिक्कत इस बात से नहीं है कि भारत, रूस से तेल क्यों खरीद रहा है? बल्कि उसे दिक्कत उसे इस बात से हो रही है कि भारत उससे तेल क्यों नहीं खरीद रहा? ट्रंप के मन में कहीं न कहीं इस बात की चुभन है। भारत अगर अमेरिका से अपना तेल खरीद छह-सात प्रतिशत से बढ़ाकर 15-20 प्रतिशत कर दे तो हो सकता है कि अमेरिका टैरिफ लगाने की बात न करे।

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विकास के लिए जरूरी है तेल की अबाधित आपूर्ति

कुल मुलाकर देखें तो अमेरिका एक तरह से भारत की ऊर्जा जरूरतों की जो आपूर्ति रही है उसे सीमित करता जा रहा है। विकास की पूरी धुरी ही ऊर्जा यानी एनर्जी पर टिकी है। यह एनर्जी कच्चे तेल, एलएनजी और पीएनजी के रूप में हो सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एनर्जी जरूरी है। एनर्जी का प्रवाह बाधित हुआ तो इसका असर सीधे अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत अभी 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में पांचवें स्थान पर है। वह जल्द से जल्द जापान और जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहता है लेकिन ऊर्जा का प्रवाह यदि बाधित हुआ तो इसमें देरी हो सकती है लेकिन भारत ऐसा नहीं होने देगा। वह इसका भी कोई न कोई काट या रास्ता निकाल ही लेगा।

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