पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में जारी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। 20 सांसदों और 60 से ज्यादा विधायकों के ममता से बगावत करने के बाद अब उनके एक पूर्व मंत्री ने भी पार्टी से किनारा कर लिया है। शुक्रवार को पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मलिक ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफ दे दिया। उन्होंने इसके पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। इसके अलावा, उत्तरी बंगाल में तृणमूल के वरिष्ठ नेता गौतम देब ने सिलीगुड़ी नगर निगम के महापौर पद से त्यागपत्र देते हुए सरकारी गाड़ी व सुरक्षा वापस कर दी है।
तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के लंबे समय तक सहयोगी रहे मलिक ने कहा कि वह अपने इस फैसले की जानकारी पार्टी नेतृत्व को पहले ही दे चुके हैं। मलिक ने कहा, 'मैंने अपनी बहुत खराब सेहत की वजह से तृणमूल के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। पिछले कुछ महीनों में मेरी सेहत बहुत ज़्यादा बिगड़ गई है। मेरे शरीर में शुगर का स्तर असामान्य रूप से बढ़ गया है। इसके साथ ही मैं गुर्दे की गंभीर बीमारी से भी जूझ रहा हूं। ऐसे हालात में, पार्टी की कार्यकारी समिति और दूसरे पदों की ज़िम्मेदारियां निभाना नामुमकिन हो गया है। जब आप काम ही नहीं कर सकते,तो किसी पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है।’
मलिक ने पार्टी में बगावत को लेकर पूछे गए सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को लेकर मुझे कोई निराशा नहीं है। जिन लोगों ने उनके खिलाफ बगावत की है,वे अनुभवी नेता हैं और ऐसा करने के पीछे उनकी अपनी वजहें जरूर होंगी।
2011 से 2021 तक रहे राज्य के खाद्य और आपूर्ति मंत्री
बता दें कि पांच बार के विधायक मलिक 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य और आपूर्ति मंत्री और उसके बाद के तीन वर्षों तक राज्य के वन मंत्री रहे। वह पहली बार गायघाट से चुनाव जीते और उसके बाद उत्तर 24 परगना के हाबरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
उत्तर 24 परगना जिले के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक होने के नाते मलिक ने पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई। हालांकि मलिक को 2026 के विधानसभा चुनावों में अपने गढ़ 'हाबरा' में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के देबदास मंडल के हाथों अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा। देबदास मंडल ने उन्हें 31,000 से ज्यादा मतों के अंतर से हराया।
2023 में ईडी ने किया था गिरफ्तार
इससे पहले, मलिक के राजनीतिक करियर को तब बड़ा झटका लगा था,जब अक्टूबर 2023 में कथित राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। उन्हें करीब 15 महीने जेल में बिताने के बाद जनवरी 2025 में जमानत पर रिहा किया गया।
मलिक ने ऐसे समय अपना इस्तीफा दिया है जब तृणमूल के संसदीय और विधायक दल में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत हुई है। इस बाबत ममता बनर्जी ने टीएमसी संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया और मलिक को नवगठित कार्यकारी समिति में शामिल किया था।
ज्योतिप्रिय मलिक के इस्तीफे पर क्या बोली भाजपा?
वहीं, ममता बनर्जी के खास रहे मलिक के इस्तीफे पर भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है। सत्तारूढ़ भाजपा के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने मलिक के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस पार्टी का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है,उसके लिए ऐसे कदमों का कोई खास महत्व नहीं है। हो सकता है कि वह पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दें, लेकिन इससे उन्हें अपने अपराधों से मुक्ति नहीं मिलेगी। देश के कानून के मुताबिक ही उनके मामले में फ़ैसला होगा।
सिलीगुड़ी के महापौर देब ने भी दिया इस्तीफा,छोड़ा पद और सरकारी सुविधाएं
इस बीच, राज्य की सत्ता में हुए बदलाव के बाद सिलीगुड़ी के महापौर देब ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम और बिधाननगर की महापौर कृष्णा चक्रवर्ती भी इस्तीफा दे चुकी हैं। दार्जिलिंग की पहाड़ियों में गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन के मुख्य कार्यकारी और ममता बनर्जी के सहयोगी अनित थापा ने भी 17 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
