Times Now Summit 2025: टाइम्स नाउ समिट 2025 के मंच पर बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी और एमआईएएम नेता वारिस पठान भी पहुंचे और दोनों आमने-सामने नजर आए। हालिया रिलीज चर्चित फिल्म छावा और ध्रुवीकरण के आरोपों पर दोनो ने अपना पक्ष रखा। वारिस पठान ने जहां बीजेपी पर नफरत फैलाने और वक्फ की जमीन लेने की साजिश का आरोप लगाया, वहीं सुधांशु त्रिवेदी ने इसका पुरजोर जवाब देते हुए पठान को आईना दिखाया।
वारिस पठान बोले, बीजेपी है मास्टरमाइंड
वारिस पठान ने कहा, आप जानते हैं पोलाराइजेशन में बीजेपी मास्टरमाइंड है। इसलिए ये नहीं कहा जाना चाहिए कि हम ध्रुवीकरण करते हैं। हां, हम अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों की बात जरूर करते हैं। बीजेपी विकास की बात नहीं करती है, सिर्फ मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने की बात करती है। ध्रुवीकरण करती है और इसी नाम पर वोट लेती है।
पठान ने कहा, बीजेपी हिजाब से चिढ़ती है, हमारी खान-पान की आदतों से चिढ़ती है, हमारी मस्जिदों को पसंद नहीं करती है। और अब बीजेपी वक्फ जमीन को लेने की कोशिश में है, जो हमारी है और गरीबों के लिए हैं, लोगों ने अपनी निजी जमीन दान की है। पठान ने पूछा, सुधांशु जी ये बताइए की वक्फ एक्ट लाने की क्या जरूरत थी, 9-10 लाख एकड़ ये हमारी जमीन है। हमें पता है कि बीजेपी की नीयत में ही खोट है। आपके पास हिंदू एंडोमेंट बोर्ड है, बताइए कि आप किसी मुसलमान को कुछ देंगे। इनका मकसद पोलाराइज करके फायदा उठाना है।
सुधांशु त्रिवेदी ने दिया जवाब
इस पर सुधांशु त्रिवेदी जवाब दिया, ये मुद्दा कहां से शुरू हुआ, अबू आजमी ने अनावश्यक रूप से औरंगजेब का मुद्दा उठाया। फिर कांग्रेस के राशिद अल्वी, इमरान मसूद, फिर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी औरंगजेब की कब्र पर गए और फातिहा पढ़ा। फिर सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने अनावश्यक रूप से बाबर की औलाद और राणा सांगा का विवाद छेड़ा। क्या हमने ये सब किया, सारे आरोप गलत हैं। औरंगजेब के पीछे सभी मुस्लिम नेता खड़े हो गए, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट और एमआईएम। एक तानाशाह बादशाह के पीछे सभी मुस्लिम नेता खड़े हो गए लेकिन हमारे भगवान के लिए हिंदू नेता एक नहीं हुए।
सामने रखे वक्फ के कई तथ्य
त्रिवेदी ने कहा, जहां तक वक्फ की बात है, अगर ये आपकी जमीन है तो कोई बात नहीं, लेकिन आपकी जमीन पर कोई क्लेम कर दे, आप जमीन ऐसे ही दे देते हैं। कोर्ट में जाते हैं न, वक्फ ने दिल्ली की 120 प्रॉपर्टी क्लेम की, 2014 में कांग्रेस ने जाते-जाते सब जमीन दे दी। क्या कोई एक उदाहरण दे सकते हैं जहां सरकार ने कोर्ट में गए बिना ही पूरी जमीन दे दी। इसीलिए हम कहते हैं कि यह जमीन किसी व्यक्ति या समुदाय की नहीं बल्कि सरकार की थी, यहां तक की संसद पर भी दावा कर दिया गया। इसमें क्लेम करने की मियाद 12 साल है, लेकिन उसे वक्फ एक्ट से हटा दिया गया। प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट क्या कहता है, ये कहता है कि कोई भी पूजास्थल 1947 के स्टेटस में बदलाव नहीं कर सकता, लेकिन तिरुचिरापल्ली मंदिर पर दावा इसके एकदम उलट है। इसे वापस नहीं लेना है, एक्ट का इस्तेमाल वहीं करना है जहां हिंदू समाज को नुकसान हो।
