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'मिया वाली टिप्पणी के लिए जो लोग कर रहे मेरी आलोचना...', हिमंत ने विपक्षियों को घेरा; SC का आदेश पढ़ने की दी नसीहत

MIYA Remark: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा कि 'मिया' टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधने वालों को उच्चतम न्यायालय का वह आदेश पढ़ना चाहिए।

Himanta Biswa Sarma

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (फोटो साभार: @himantabiswa)

Photo : Twitter

MIYA Remark: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा कि 'मिया' टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधने वालों को उच्चतम न्यायालय का वह आदेश पढ़ना चाहिए, जिसमें राज्य पर 'चुपचाप और द्वेषपूर्ण जनसांख्यिकीय आक्रमण' का उल्लेख किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 'मिया' समुदाय के लोगों को 'परेशान' किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें असम में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरमा ने अवैध रूप से भारत में दाखिल होने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए 'मिया' शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की इस प्रक्रिया में किसी भी असमिया व्यक्ति (हिंदू या मुस्लिम) को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों ने सरमा की इस टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की है।

विपक्षियों पर बरसे हिमंत

मुख्यमंत्री सरमा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जो लोग 'मिया' पर मेरी टिप्पणी के लिए मुझ पर निशाना साध रहे हैं, उन्हें यह पढ़ना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय ने असम के बारे में क्या कहा है।’’ असम में अवैध रूप से दाखिल होने वाले बांग्लादेशी मुसलमानों को 'मिया' कहा जाता है। उन्होंने वर्ष 2005 में उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध प्रवासी (न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारण) अधिनियम, 1983 (आईएमडीटी अधिनियम) को रद्द करते हुए दिए गए फैसले का हवाला देते हुए यह बात कही।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने दावा किया कि देश की शीर्ष संवैधानिक अदालत ने 'जनसांख्यिकीय आक्रमण' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और क्षेत्र तथा राष्ट्रीय एकता के संभावित नुकसान की चेतावनी दी और न्यायालय ने यह स्वीकार किया कि वास्तविकता न तो घृणा है, न ही सांप्रदायिकता है, और न ही यह किसी समुदाय पर हमला है।

असम में अभी चल रही SIR प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग ने त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने के लिए असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का निर्देश दिया था। निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय की निगरानी में असम में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया था, जिसका उद्देश्य नागरिकता का सत्यापन करना था। यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। असम में नागरिकता अधिनियम के तहत नागरिकता संबंधी अलग प्रावधान हैं।

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अनुराग गुप्ता
अनुराग गुप्ता author

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

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