योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा देश में शिक्षा और सरकारी भर्तियों में हो रही धांधली को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीति गरमा गई है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर शिमला में पत्रकारों से बात करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यदि बाबा रामदेव जैसा व्यक्तित्व इस तरह की बात उठा रहा है, तो निश्चित तौर पर कहीं न कहीं व्यवस्था में कुछ गड़बड़ी जरूर है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव को अब भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नया आंदोलन शुरू करना चाहिए।
पीटीआई के मुताबिक मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि उनके साढ़े तीन साल के कार्यकाल में राज्य में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के शासनकाल में पुलिस भर्ती और चयन आयोग के पर्चे बेचे गए थे। सुक्खू ने कहा कि जब तक ऊपर से निर्देश या शह नहीं मिलती, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं हो सकतीं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: पेपर लीक से पुलिसिया दमन तक... तेजस्वी यादव ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 19 अगस्त को राजभवन मार्च का ऐलान
उनकी सरकार में धांधली करने वाले और पेपर बेचने वाले आज भी सलाखों के पीछे हैं। दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी बाबा रामदेव के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए और बाबा रामदेव की भावनाएं सही दिशा में हैं।
इससे पहले पतंजलि योगपीठ में बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि परीक्षाओं में हो रहे घपले और धांधली को जल्द ठीक नहीं किया गया, तो युवाओं का गुस्सा और बढ़ सकता है। उन्होंने 2011 के रामलीला मैदान आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने 'जेन ज़ी' (Gen Z) यानी युवा पीढ़ी से अपील की कि वे अपना विरोध पूरी तरह से संवैधानिक और शांतिपूर्ण दायरे में ही रखें।
