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तवांग पर चीन की टेढ़ी नजर का ये है राज, भारत इन वजहों से पड़ता है भारी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 13, 2022, 02:24 PM IST

India-China Faceoff in Tawang: तवांग पश्चिमी अरूणाचल प्रदेश में स्थित है और इसकी सीमा चीन और भूटान दोनों से मिलती है। ऐसे में सैन्य रणनीति के लिहाज से यह बेहद अहम लोकेशन पर है। 9 दिसंबर 2022 को दोनों देशों के बीच पूर्वी तवांग के यांगट्सी इलाके में झड़प हुई थी। यांगट्सी इलाके में एक नाला है, जिसके एक तरफ भारतीय सेना रहती है और दूसरी तरफ चीन की सेना रहती है।

KEY HIGHLIGHTS
  • 1959 में जब तिब्बत में स्वायत्ता के लिए चीन के खिलाफ विद्रोह हुआ तो उस वक्त वक्त 14 वें दलाई लामा तवांग के रास्ते ही भारत आए थे।
  • तवांग चीन और भूटान की सीमा पर स्थित है, ऐसे में भारत के लिए रणनीतिक रूप से यह इलाका बेहद अहम है।
  • भारत और चीन के बीच साल 1962 में भी इस इलाके में झड़प हो चुकी है। और युद्ध के बाद चीन इस इलाके से हट गया था।

Tawang Clash: करीब ढाई साल बाद एक बार फिर चीन ने हिमाकत दिखाई है। चीन की सेना PLA ने 9 दिसंबर को अरूणाचल प्रदेश के तवांग में सीमा पर भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सैनिकों ने अपनी बहादुरी से उनके इरादा नाकाम कर दिए और चीनी सैनिकों को पीछे खदेड़ दिया। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प भी हुई। जिसमें सैनिकों को मामूली चोटें भी आई हैं। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार चीन सैनिक ज्यादा घायल हुए है। ऐसा पहली बार नही है जब चीन ने तवांग में हिमाकत दिखाई है, साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान चीन ने इस इलाके में दुस्साहस दिखाया था। लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद वह पीछे चला गया था।

रणनीतिक रूप से बेहद अहम है तवांग

तवांग पश्चिमी अरूणाचल प्रदेश में स्थित है और इसकी सीमा चीन और भूटान दोनों से मिलती है। ऐसे में सैन्य रणनीति के लिहाज से यह बेहद अहम लोकेशन पर है। भारत और चीन के बीच 3488 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। लेकिन 1914 में अंग्रेजों के समय भारत-चीन-तिब्बत के बीच हुए समझौते को चीन मानने से इंकार करता रहा है। इस कारण दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारण के लिए बनी मैकमोहन लाइन का उल्लंघन चीन करता आया है। असल में चीन, तिब्बत को स्वतंत्र देश नहीं मानता है और वह बार-बार अरूणाचल प्रदेश को तिब्बत यानी चीन का हिस्सा कहता है।

रिपोर्ट के अनुसार 9 दिसंबर 2022 को दोनों देशों के बीच पूर्वी तवांग के यांगट्सी इलाके में झड़प हुई थी। यांगट्सी इलाके में एक नाला है, जिसके एक तरफ भारतीय सेना रहती है और दूसरी तरफ चीन की सेना रहती है। चीन और भूटान की सीमा पर स्थित होने के कारण अगर चीन तवांग के इलाकों में कब्जा कर लेगा तो न केवल वह भारत के खिलाफ युद्द की स्थिति में मजबूत पोजीशन पर होगा, बल्कि वह अरूणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताने का राग अलापना तेज कर देगा।

तवांग से ही भारत आए थे दलाई लामा

असल में जब 1959 में जब तिब्बत में स्वायत्ता के लिए चीन के खिलाफ विद्रोह हुआ तो उस वक्त चीन ने तिब्बतियों के साथ बड़ा क्रूर व्यवहार किया था। उस वक्त 14 वें दलाई लामा तवांग के रास्ते ही भारत आए थे। और बाद में भारत ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में शरण दी। चीन को यह बाद भी हमेशा खटकती रहती है कि भारत ने दलाई लामा को शरण दे रखी है। बौद्ध धर्म में तवांग का बेहद अहम महत्व है। और वह छठे दलाई लामा का जन्म स्थान भी है। ऐसे में तवांग में तिब्बती लोगों की काफी संख्या है। चीन को लगता है कि तवांग का इलाका भारत में रहने से वह तिब्बतियों की स्वायत्ता की मांग को कुचल नहीं सकता। ऐसे में तवांग पर टेढ़ी नजर रखता है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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