India Pakistan Ceasefire: भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने दो टूक लहजे में पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया कि सिंधु जलसंधि स्थगित रहेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ महज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और आतंकवाद के मुद्दे पर बात होगी। उन्होंने पाकिस्तान से सीमापार आतंकवाद रोकने को कहा।
जयशंकर ने क्या कुछ कहा?
जयशंकर दिल्ली में होंडुरास दूतावास के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत होगी और महज आतंकवाद और पीओके पर होगी। होंडुरास दूतावास के उद्घाटन के अवसर पर विदेश मंत्री ने कहा, "हमारे लिए यह बहुत अच्छी बात है कि हमारे पास होंडुरास का नया दूतावास है। वे उन देशों में से एक हैं जिन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले के समय मजबूत एकजुटता व्यक्त की थी। मैं इसकी सराहना करता हूं।"
जयशंकर ने कहा कि हमें वास्तव में बहुत सारा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला... हमारे पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का प्रस्ताव था कि अपराधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के माध्यम से उन्हें जवाबदेह ठहराया गया।
PAK के मंसूबों पर फिरा पानी
कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या के बाद इसी महीने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर था। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने कायरतापूर्ण कार्रवाई करते हुए ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला किया। भारत की एस-400 सहित अन्य मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर दिया। हालांकि, बाद में दोनों देशों ने सीजफायर की घोषणा की।
'सिर्फ आतंकवाद पर PAK से होगी बात'
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध और व्यवहार पूरी तरह से द्विपक्षीय होंगे। यह वर्षों से राष्ट्रीय सहमति है और इसमें बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल आतंकवाद पर होगी। पाकिस्तान के पास आतंकवादियों की एक सूची है जिसे सौंपे जाने की आवश्यकता है और उन्हें आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को बंद करना होगा। वे जानते हैं कि क्या करना है। हम उनके साथ आतंकवाद के बारे में चर्चा करने के लिए तैयार हैं। ये वे वार्ताएं हैं, जो संभव हैं।
