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सवाई माधोपुर में आदमखोर तेंदुए का आतंक, आंगन से मासूम को उठाकर बनाया निवाला! फलौदी रेंज में भारी बवाल

राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित फलौदी रेंज के आसपास बसे गांव से एक बच्चे को तेंदुआ उठा ले गया। ग्रामीणों को उसका शव पहाड़ी के पास मिला, जिसके बाद आक्रोशित लोगों ने जमकर बवाल काटा।

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तेंदुआ (फोटो-Istock)

सवाई माधोपुर : जिले में बृहस्पतिवार को तेंदुए के हमले में तीन वर्षीय एक बच्चे की मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, घटना दूमोदा गांव के बैरवा मोहल्ले की है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय व्याप्त है। आक्रोशित लोगों ने स्थानीय प्रशासन और फलौदी रेंज के पास जमकर हंगामा काटा और आदमखोर को पकड़ने की मांग की।

दिलखुश बैरवा को घर से उठा ले गया तेंदुआ

रणथंभौर बाघ अभयारण्य के उपवन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि दूमोदा गांव निवासी संजय बैरवा का बेटा दिलखुश बैरवा घर के आंगन में खेल रहा था तभी अचानक एक तेंदुआ वहां पहुंचा और बच्चे को दबोचकर जंगल की ओर ले गया।

बच्चा पहाड़ी पर लहूलुहान हालत में मिला

उन्होंने बताया कि घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने जंगल में बच्चे की तलाश शुरू की। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मिलकर तलाश अभियान चलाया। अधिकारी ने बताया कि बच्चा पहाड़ी पर लहूलुहान हालत में मिला। उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया जहां पर चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

फलौदी रेंज कार्यालय पर ग्रामीणों का हंगामा

बच्चे की मौत की खबर सुनकर गुस्साए ग्रामीणों ने फलौदी रेंज कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने फलौदी रेंज कार्यालय में रखी मोटरसाइकिल को आग लगा दी। घटना के बाद गांव में दहशत फैल गई है। फलोदी वन क्षेत्र में लगातार तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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