Warfare Tactics: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) ने पुणे में कहा कि युद्ध का स्वरूप हमेशा बदलता रहा है और कभी स्थिर नहीं रहा। इस दौरान, उन्होंने Gen Z को लेकर भी अपनी बात रखी। हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर जेन जी का सबसे बड़ा आंदोलन देखा।
समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में जनरल नरवणे (रिटायर्ड) ने कहा, ''हर पीढ़ी अलग होती है... नई पीढ़ी का अलग-अलग मुद्दों को देखने का अपना नजरिया है, जो हमेशा आपकी सोच से मेल खाए। इसका मतलब यह नहीं है कि वे गलत हैं।''
'टोकना बहुत आसान'
उन्होंने कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि नई पीढ़ी को क्या प्रेरित करता है और उस एनर्जी का सही इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि युवा देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते, बल्कि वे भी मानते हैं कि वे जो कर रहे हैं, वह देश की बेहतरी और भलाई के लिए है। इसलिए हमें उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए। टोकना बहुत आसान होता है। किसी को समझना और अगर कोई गलती कर रहा है तो उसे समझाना हमारा ही काम होता है।
'युद्ध का हमेशा बदलता है स्वरूप'
जनरल नरवणे ने कहा कि युद्ध का स्वरूप हमेशा बदलता रहा है और कभी स्थिर नहीं रहा। इतिहास पर नजर डालें तो पहले हम मुक्कों या डंडों से लड़ते थे, फिर तलवार और भाले आए, उसके बाद बंदूकें, मशीन गन, एयरक्राफ्ट और वायु शक्ति और फिर रॉकेट जैसे हथियार युद्ध का हिस्सा बने। यानी युद्ध लगातार बदलता रहा है और सेनाओं ने भी इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढाला है।
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उन्होंने कहा कि हम हमेशा इन नई टेक्नोलॉजी को अपनाने में सबसे आगे रहे हैं। इसी तरह, अब ड्रोन वॉरफेयर और साइबर वॉरफेयर जैसी तकनीकों को भी अपनाया जाएगा और उन्हें भविष्य की सैन्य रणनीति और युद्ध सिद्धांत में शामिल किया जाएगा। हम कभी पीछे नहीं रहेंगे।
जनरल नरवणे ने कहा कि दुनिया में हो रहे विभिन्न संघर्षों से सबक लेकर उन्हें अगली जंग शुरू होने से पहले ही अपनी सेना में लागू करना चाहिए। अगला युद्ध लड़ते समय आपको पिछली जंग की रणनीति के साथ नहीं उतरना चाहिए, बल्कि मौजूदा समय के युद्ध की जरूरतों और तकनीकों के हिसाब से लड़ना चाहिए।
