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'राहत मिली, पर असली लड़ाई अभी बाकी', ताहिर हुसैन को उम्रकैद मिलने के बाद अंकित शर्मा के परिवार का बड़ा बयान

Tahir Hussain Life Imprisonment: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मारे गए आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा के मामले में अदालत ने पूर्व 'आप' पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अंकित के परिवार ने इस फैसले पर राहत जताई है, लेकिन उनका कहना है कि यह राहत अधूरी है।

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ताहिर हुसैन को उम्रकैद अंकित शर्मा के परिवार को मिली राहत

Photo : PTI

Tahir Hussain Life Imprisonment: साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के जख्म आज भी उन परिवारों के दिलों में हरे हैं, जिन्होंने अपने अपनों को खोया था। इन्हीं दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के जांबाज कर्मचारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। करीब छह साल लंबे चले कानूनी सफर के बाद, दिल्ली की अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

इस फैसले के बाद अंकित के परिवार (Ankit sharma family Reaction) को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनके चेहरे पर वो खुशी नहीं है जो एक जीत के बाद होती है। अंकित के भाई अंकुर शर्मा का कहना है कि यह फैसला उनके वर्षों के संघर्ष और न्याय व्यवस्था पर जताए गए भरोसे की जीत है, लेकिन इससे उनके भाई के चले जाने से पैदा हुआ खालीपन कभी नहीं भर सकता।

'छह सालों तक हर दिन उनके परिवार के लिए किसी बुरे सपने जैसा'

अंकुर ने भावुक होते हुए बताया कि पिछले छह सालों का हर दिन उनके परिवार के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा है। जब भी टीवी या अखबारों में इस मामले की चर्चा होती थी, तो परिवार के पुराने जख्म फिर से ताजा हो जाते थे। हर पारिवारिक मौके पर अंकित की कमी बहुत खलती है। अंकुर ने याद करते हुए कहा कि अगर आज उनका भाई जिंदा होता, तो वह 32 साल का हो चुका होता।

दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है मामला

अदालत ने भले ही अपराध की गंभीरता को मानते हुए उम्रकैद की सजा दी है, लेकिन अंकित का परिवार इस फैसले को ही अंतिम इंसाफ नहीं मानता। उनका कहना है कि यह मामला 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rare of Rarest) श्रेणी में आता है। परिवार की कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है; वे दोषियों को और भी सख्त सजा दिलाने के लिए ऊपरी अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे।

दूसरी तरफ, सजा मिलने के बाद आरोपी ताहिर हुसैन का रुख भी सामने आया है। अदालत परिसर से बाहर निकलते समय उसने साफ कहा कि वह इस फैसले से सहमत नहीं है और न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख करेगा। अंकित शर्मा का परिवार आज भी उस दिन का इंतजार कर रहा है, जब अदालत का आखिरी फैसला उनके भाई की आत्मा को पूरी तरह शांति देगा।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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