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Delimitation Bill: परिसीमन विधेयक पर NCP(SP) के समर्थन की खबरों को सुप्रिया सुले ने किया खारिज

सुप्रिया सुले ने कहा, 'यह छोटी सी बात का बतंगड़ बनाने जैसा है। मैं अभी किसी बिल पर बात नहीं कर रही हूं। हमारे सामने अभी कोई बिल नहीं है। जब बिल हमारे पास आएगा, तो हम 24 घंटे के भीतर उस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।'

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सुप्रिया सुले और शरद पवार (फाइल फोटो)

सुप्रिया सुले ने NCP(SP) के परिसीमन बिल (Delimitation Bill) का समर्थन करने की खबरों को खारिज किया: इसे 'छोटी सी बात का बतंगड़' बताया। 'मैं अभी किसी बिल पर बात नहीं कर रही हूं। हमारे सामने अभी बिल नहीं है। जब यह हमारे पास आएगा, तो हम 24 घंटे में जवाब देंगे', ऐसा नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा।

ऐसी खबरें आ रही हैं कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) संसद के आने वाले मॉनसून सत्र में विवादित परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है। इन अटकलों को कम करते हुए पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को इसे 'छोटी सी बात का बतंगड़' बताया और कहा कि उनकी पार्टी ने इस प्रस्तावित कानून पर कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है।

पार्टी प्रमुख शरद पवार और वरिष्ठ नेताओं जयंत पाटिल व शशिकांत शिंदे के साथ बातचीत के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुले ने कहा कि NCP (SP) के बिल का समर्थन करने का फैसला लेने वाली खबरें बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा, 'यह छोटी सी बात का बतंगड़ बनाने जैसा है...'

केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण कानून पर चर्चा

सुले की यह टिप्पणी शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) की बदलती राजनीतिक स्थिति को लेकर फिर से शुरू हुई अटकलों के बीच आई है, जो NCP के दोनों गुटों से जुड़ी हालिया घटनाओं के बाद सामने आई हैं। केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) और महिला आरक्षण कानून पर चर्चा होने वाली है। ऐसे में खबरों के अनुसार, NCP (SP) सत्ताधारी गठबंधन से बाहर रहते हुए भी इन अहम विधेयकों पर BJP के नेतृत्व वाले NDA को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने पर विचार कर सकती है।

'पार्टी ने इस मुद्दे पर बात करने के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया'

बिना नाम वाले सूत्रों पर आधारित खबरों को खारिज करते हुए, NCP (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे पर बात करने के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया है। उन्होंने कहा, 'NCP (SP) ने किसी भी अखबार या टीवी चैनल से बात नहीं की है। हमने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।' सुले ने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद ही मीडिया से बात कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'मैं जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे और शरद पवार से चर्चा के बाद यहां आई हूं।'

'भाजपा के साथ पिछले दरवाजे से कोई बातचीत नहीं हो रही'

सुप्रिया सुले ने बुधवार को अपनी पार्टी के नेताओं और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई मुलाकातों को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि ये बैठकें सियासी रणनीति का हिस्सा नहीं थीं। सुले ने मुंबई में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने राकांपा (शप) के नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ की गई कार्रवाई का मुद्दा उठाने के लिए फडणवीस से आधिकारिक तौर पर मिलने का समय मांगा था।

उन्होंने कहा, 'जयंत पाटिल ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा, अपनी कार से गए और अपनी कार से ही वापस आए। इस बैठक में कुछ भी गुप्त नहीं था। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री से उनके आवास पर और कौन-कौन मिला, तो आपको मुख्यमंत्री से पूछना चाहिए, मुझसे नहीं।' मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ’वर्षा’ में मंगलवार देर रात सत्तारूढ़ ’महायुति’ में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) में शामिल राकांपा (शप) के नेताओं के बीच हुई मुलाकातों से महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण बदलने की अटकलें तेज हो गईं।ये बैठकें कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के उस दावे के बीच हुईं कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शरद पवार की अगुवाई वाली राकांपा (शप) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है।चिदंबरम के मुताबिक, यह समर्थन 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जुटाया जा रहा है, जिसमें लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव है।

'मीडिया पिछले 12 वर्षों से उन्हें मंत्री पद मिलने की भविष्यवाणी कर रहा है'

सुले ने राकांपा (शप) के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मीडिया पिछले 12 वर्षों से उन्हें मंत्री पद मिलने की भविष्यवाणी कर रहा है।उन्होंने कहा, 'कौन-सा विभाग किसे मिलेगा, यह फैसला केवल मुख्यमंत्री ही करते हैं। वित्त विभाग या ’वर्षा’ में हुई बैठकों के बारे में आ रही सभी खबरें केवल अटकलें हैं। ऐसे सवालों का जवाब केवल मुख्यमंत्री ही दे सकते हैं।'

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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