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सुप्रीम कोर्ट कल आवारा कुत्तों के मामले की करेगा सुनवाई, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव होंगे पेश

22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के पालन के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा था। यह मामला सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की तीन जजों की स्पेशल बेंच के सामने सुनवाई के लिए आएगा।

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सुप्रीम कोर्ट कल आवारा कुत्तों के मामले की करेगा सुनवाई (PTI)

Supreme Court on Stray Dog Case: सुप्रीम कोर्ट 3 नवंबर को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई करने वाला है, जिसमें उसने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया था।

27 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए, टॉप कोर्ट ने मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को उसके सामने पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि कोर्ट के 22 अगस्त के आदेश के बावजूद कंप्लायंस एफिडेविट क्यों दाखिल नहीं किए गए।

क्या है मामला?

22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के पालन के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा था। यह मामला सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की तीन जजों की स्पेशल बेंच के सामने सुनवाई के लिए आएगा।

31 अक्टूबर को टॉप कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को फिजिकली पेश होने से छूट देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि कोर्ट के आदेश का कोई सम्मान नहीं है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले का जिक्र किया था और बेंच से गुजारिश की थी कि चीफ सेक्रेटरी को कोर्ट के सामने वर्चुअली पेश होने दिया जाए। बेंच ने 22 अगस्त के अपने ऑर्डर का पालन न करने पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि 27 अक्टूबर तक, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (MCD) को छोड़कर, किसी भी राज्य और UT ने कंप्लायंस एफिडेविट फाइल नहीं किया था।

कोर्ट में पेश होकर देंगे जवाब

इसने साफ कर दिया था कि चीफ सेक्रेटरी को कोर्ट में पेश होकर बताना होगा कि उन्होंने कंप्लायंस एफिडेविट क्यों फाइल नहीं किया। बेंच ने कहा था कि जब 27 अक्टूबर को मामले की सुनवाई हुई, तो सिर्फ पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और MCD ने ही कंप्लायंस एफिडेविट फाइल किए थे।

27 अक्टूबर को टॉप कोर्ट ने उन राज्यों और UT को फटकार लगाई थी, जिन्होंने इस मामले में अपने कंप्लायंस एफिडेविट फाइल नहीं किए थे और कहा था कि लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और दूसरे देशों में देश को नीचा दिखाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली-नेशनल कैपिटल रीजन की सीमाओं से बाहर बढ़ा दिया था और निर्देश दिया था कि सभी राज्यों और UTs को इस मामले में पार्टी बनाया जाए।

कोर्ट ने दिया था ये आदेश

कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को ABC रूल्स के पालन के लिए आज की तारीख तक उपलब्ध डॉग पाउंड, जानवरों के डॉक्टर, कुत्ते पकड़ने वाले कर्मचारी और खास तौर पर मॉडिफाइड गाड़ियों और पिंजरों जैसे रिसोर्स के पूरे स्टैटिस्टिक्स के साथ पालन का एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया था।

बेंच ने इस मामले में राज्यों और UTs को भी शामिल किया था। साथ ही यह भी कहा था कि ABC रूल्स पूरे भारत में एक जैसे लागू होते हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट एक सू मोटो केस की सुनवाई कर रहा है, जो 28 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट पर शुरू किया गया था, जिसमें बताया गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से खासकर बच्चों में रेबीज फैल रहा है।

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 Nitin Arora
Nitin Arora Author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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