'पति-पत्नी के बीच लंबे समय तक अलगाव दोनों के लिए क्रूरता के समान'; सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 15, 2025, 11:37 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने 24 वर्षों से अलग रह रहे एक दंपति की तलाक याचिका को मंजूरी दी। इस दौरान शीर्ष कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां कीं। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि समझौते की उम्मीद के बिना लंबे समय तक अलग रहना विवाह को सिर्फ कागजों तक सीमित कर देता है।
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पति-पत्नी के रिश्ते और उनमें दूरियों को लेकर अहम टिप्पणी की है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय तक अलगाव दोनों के लिए क्रूरता के समान है। इसके साथ ही अदालत ने अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी की तलाक अर्जी को मंजूरी दे दी।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि चार अगस्त 2000 को शादी के बंधन में बंधने वाले दंपति ने विवाह के महज दो साल बाद 2003 में मुकदमेबाजी शुरू कर दी और विचारों में मतभेद के कारण 24 वर्षों से अलग रह रहे हैं। अदालतों की ओर से बार-बार प्रयास किए जाने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच कोई सुलह-समझौता नहीं हुआ।
पीठ ने कहा कि कई मामलों में इस अदालत के सामने ऐसी स्थितियां आई हैं, जहां पक्षकार काफी समय से अलग रह रहे हैं और यह लगातार माना गया है कि सुलह की कोई उम्मीद के बिना लंबे समय तक अलग रहना दोनों पक्षों के लिए क्रूरता के बराबर है। ऐसे में यह न्यायालय भी इस बात से सहमत है कि वैवाहिक विवाद से जुड़े मुकदमों का लंबे समय तक लंबित रहना विवाह को केवल कागजों तक सीमित कर देता है। ऐसे मामलों में जहां मुकदमा काफी समय से लंबित है, पक्षों के बीच संबंध तोड़ देना ही पक्षों और समाज के हित में है। इसलिए, इस न्यायालय की राय है कि पक्षों को राहत दिए बिना वैवाहिक मुकदमे को अदालत में लंबित रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा।
शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए शिलांग निवासी दंपति के विवाह को खत्म करने का आदेश दिया। अदालत ने शिलांग के अतिरिक्त उपायुक्त (न्यायिक) के आदेश को बरकरार रखा और उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने पत्नी की इस दलील पर विवाह को बहाल किया था कि उसका पति को स्थायी रूप से त्यागने या छोड़ने का कोई इरादा नहीं है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।