'क्रिकेट संस्थाओं में पूर्व क्रिकेटर हों न कि वे जिन्हें बल्ला पकड़ना भी नहीं आता'; सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की ऐसी टिप्पणी
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 3, 2026, 09:56 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया जिसने महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए) के चुनावों पर रोक लगा दी थी जो मूल रूप से छह जनवरी को होने वाले थे। इन चुनावों में 'भाई-भतीजावाद और पक्षपात'के आरोप लगाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गैर विशेषज्ञों द्वारा खेल संस्थाओं के प्रबंधन पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि क्रिकेट संघ का नेतृत्व संन्यास ले चुके क्रिकेटरों को करना चाहिए,ना कि ऐसे लोगों को जिन्हें बल्ला पकड़ना भी नहीं आता। सीजेआई सूर्यकांत,न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने ये टिप्पणी महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए)के चुनावों से जुड़े मामले में की।
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर रोक से किया इनकार
इस टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया जिसने महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए) के चुनावों पर रोक लगा दी थी जो मूल रूप से छह जनवरी को होने वाले थे। इन चुनावों में 'भाई-भतीजावाद और पक्षपात'के आरोप लगाए गए थे।शीर्ष कोर्ट बंबई हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एमसीए द्वारा दायर याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सीजेआई ने एमसीए की सदस्यता में अचानक हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाया
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एमसीए की सदस्यता में अचानक हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाया। रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए पीठ ने कहा कि संघ में 1986 और 2023 के बीच 164 सदस्य थे लेकिन उसके तुरंत बाद नए सदस्यों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई। इस पर सीजेआई ने पूछा कि 1986 से 2023 तक आपके पास 164 सदस्य थे और 2023 के बाद आपने बंपर ड्रॉ किया?
एमसीए और एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार सहित याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने बताया कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति ने इस प्रक्रिया की देखरेख की थी जिसमें 48 सदस्यों को खारिज कर दिया गया था जबकि अन्य को शामिल किया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि चैरिटी आयुक्त ने कैबिनेट से सलाह किए बिना एक प्रशासक नियुक्त किया था। प्रधान न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि अगर संघ अपनी सदस्यता 300 तक बढ़ाना चाहता है तो वे पद जाने-माने,सेवानिवृत्त अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए आरक्षित होने चाहिए।
सीजेआई की कड़ी और अहम टिप्पणी
सीजेआई ने कहा कि यह एक ऐसा देश है जहां बेहतरीन क्रिकेटर हैं,जो संन्यास ले चुके हैं वे सबसे अच्छे थे। उन्होंने कहा कि आप किसे ला रहे हैं? ऐसे लोग जिन्हें खेल के बारे में पता भी नहीं है, जिन्हें बल्ला पकड़ना भी नहीं आता। जो हो रहा है उस पर हमें अपनी भावनाएं ज्यादा जाहिर करने पर मजबूर नहीं करें।
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