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ठाकुर श्री बांके बिहारी के दर्शन का समय क्यों नहीं बढ़ाया जा सकता? SC ने मंदिर के भगवान के आराम करने के सवाल पर दिया ये जवाब

मंदिर के प्रबंधन के लिए SC की ओर से गठित कमेटी ने भगवान के दर्शन का वक्त रोजाना दो घंटे 30 मिनट तक बढ़ा दिया है। जहां मंदिर के सेवायत इसका विरोध कर रहे हैं। आज मंदिर की अपनी मैनेजमेंट कमेटी ने दर्शन बढ़ाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि दर्शन के वक्त को नहीं बदला जा सकता। इसके चलते भगवान से जुड़े कार्य का भी वक्त बदलता है। भगवान के आराम का अपना वक्त होता है, इसमें दखल नहीं दी जा सकती।

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सुप्रीम कोर्ट ने ठाकुर श्री बांके बिहारी के दर्शन के समय को लेकर सुनवाई की

Supreme Court on Banke Bihari Mandir: मथुरा के वृंदावन में तीन ठाकुर यानी कृष्ण भगवान तीन अलग-अलग रूप में विराजमान हैं। अलग-अलग मंदिर हैं। इनमें बांके बिहारी मंदिर में भी खूब भीड़ उमड़ती है। कई बार भगदड़ जैसे हालात बन जाना और कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इस बीच मंदिर में कम जगह को लेकर व दर्शन के समय को बढ़ाने व अन्य प्रमुख मुद्दों पर अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया था। अब सोमवार को मंदिर में दर्शन को समय को बढ़ाए जाने को लेकर सुनवाई हुई। इसमें SC ने सवाल उठाया कि वृंदावन में श्री बांके मंदिर में भगवान के दर्शन का वक्त अगर बढ़ाया गया है तो इस पर क्या ऐतराज होना चाहिए?

दरअसल मंदिर के प्रबंधन के लिए SC की ओर से गठित कमेटी ने भगवान के दर्शन का वक्त रोजाना दो घंटे 30 मिनट तक बढ़ा दिया है। जहां मंदिर के सेवायत इसका विरोध कर रहे हैं। आज मंदिर की अपनी मैनेजमेंट कमेटी ने दर्शन बढ़ाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि दर्शन के वक्त को नहीं बदला जा सकता। इसके चलते भगवान से जुड़े कार्य का भी वक्त बदलता है। भगवान के आराम का अपना वक्त होता है, इसमें दखल नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने इसपर क्या जवाब दिया?

SC ने कहा, 'लेकिन भगवान के आराम के वक्त में उन्हें आराम कहां करने दिया जाता है? उस वक्त जब आम श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकते, प्रभावशाली लोग बड़ी रकम देकर पूजा करते हैं। उन्हें पूजा करने की इजाजत होती है।'

पढ़ें- पूरा मामला?

इसी साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन स्थित बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के दैनिक प्रशासन और संचालन की निगरानी एवं देखरेख के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये कमेटी बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के तहत गठित समिति के संचालन को निलंबित करते हुए बनाई थी।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास भेज दिया था। हाई कोर्ट का फैसला आने तक सुप्रीम कोर्ट से गठित हुई उच्चस्तरीय समिति ही मंदिर के प्रशासन और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में आज मंदिर की प्रबंधन समिति की ओर से शयन भोग सेवा से जुड़े गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी के द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई थी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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