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नोटबंदी का खुलेगा फिर जिन्न, जानें 6 साल पहले एक झटके में कैसे हो गया था उलट-पुलट

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 13, 2022, 06:18 PM IST

8 नवंबर 2016 को, भारत सरकार ने सभी 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद करने का फैसला किया था। इसकी जगह पर नए 500 और 2000 के नोट लाए गए थे। इस घोषणा के बाद पूरा देश कई दिनों तक बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन में खड़ा नजर आया था।

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2016 में मोदी सरकार ने की थी नोटबंदी की घोषणा

Photo : BCCL

साल 2016, तारीख 8 नवंबर, समय रात के आठ बजे, पीएम मोदी अचानक से राष्ट्र को संबोधित करते हैं और घोषणा कर देते हैं कि रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए जाएंगे। पूरे देश में हंगामा मच गया, लोग बैंकों की ओर भागे। इन नोटों की जगह पर नए 500 और 2000 के नोट लाए गए। विपक्ष ने जमकर आलोचना की, लेकिन सरकार इस योजना को सफल बताती रही।

छह साल बाद निकला नोटबंदी का जिन्न

अब एक बार फिर से नोटबंदी का जिन्न वापस निकल आया है। सुप्रीम कोर्ट छह साल बाद इससे जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही है। यह याचिका छह साल पहले दाखिल की गई थी, इस पर अब सुनवाई शुरू हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह सरकार के नीतिगत फैसलों की न्यायिक समीक्षा को लेकर ‘लक्ष्मण रेखा’ से वाकिफ है, लेकिन वह 2016 के नोटबंदी के फैसले की पड़ताल अवश्य करेगा, ताकि यह पता चल सके कि मामला केवल ‘अकादमिक’ कवायद तो नहीं था।

न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब कोई मामला संविधान पीठ के समक्ष लाया जाता है, तो उसका जवाब देना पीठ का दायित्व बन जाता है। इसके साथ ही संविधान पीठ ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से विस्तृत हलफनामा मांगा है।

जमकर हुआ वार पलटवार

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अकादमिक मुद्दों पर अदालत का समय 'बर्बाद' नहीं करना चाहिए। मेहता की दलील पर आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ता विवेक नारायण शर्मा की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि वह 'संवैधानिक पीठ के समय की बर्बादी' जैसे शब्दों से हैरान हैं, क्योंकि पिछली पीठ ने कहा था कि इन मामलों को एक संविधान पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए। एक अन्य पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने कहा कि यह मुद्दा अकादमिक नहीं है और इसका फैसला शीर्ष अदालत को करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के विमुद्रीकरण के लिए संसद से एक अलग अधिनियम की आवश्यकता है।

2016 में क्या हुआ था

8 नवंबर, 2016 को केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर घोषणा की कि सभी 500 और 1000 के नोट अब वैध नहीं रहे हैं। उनका प्रचलन बैन कर दिया गया है। इस व्यापक रूप से नोटबंदी नाम दिया गया। पूरा देश कई हफ्तों तक इस कानून के कारण परेशान रहा था। विपक्ष आरोप लगाते रहा कि सरकार के इस कदम से देश कई साल पीछे चला गया। कई लोगों के इस दौरान मरने की भी खबर आई। वहीं सरकार ने दावा किया नोटबंदी से काला धन समाप्त हो जाएगा, आतंकी-नक्सली खत्म हो जाएंगे। विपक्ष का आरोप था कि सरकार का फैसला भी गलत था और इसे लागू करने से पहले तैयारी नहीं की गई थी। यही कारण था कि रोज इसे लेकर फैसले बदले जाते रहे थे।

आया था नया नोट

नोटबंदी में जब 500 और 1000 के नोट बंद हुए तो उसकी जगह पर नए 500 और 2000 के नोट लाए गए। लोगों से कहा गया कि वो अपने पुराने नोट बैंकों में जाकर बदल लें। लोग रोज पैसों को बदलवाने के लिए लाइन में लगे रहते थे।

एजेंसी इनपुट के साथ

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