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तेलंगांना के 10 BRS MLA की अयोग्यता का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को दिया 3 महीने का वक्त

तेलंगाना में बीआरएस के 10 विधायकों की अयोग्यता मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया है।

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तेलंगांना के 10 BRS MLA की अयोग्यता मामले पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश ( PHOTO- PTI)

नई दिल्ली: तेलंगाना में बीआरएस के 10 विधायकों की अयोग्यता मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इन 10 बीआरएस विधायकों ने कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की थी, लेकिन तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष ने इनकी अयोग्यता पर लंबे समय तक कोई फैसला नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में सुनवाई करते हुए तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वह 10 बीआरएस के विधायकों की अयोग्यता पर तीन महीने में फैसला लें।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को निर्देश दिया कि BRS के 10 विधायकों की अयोग्यता पर तीन महीने मे फैसला लें, ये विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे लेकिन स्पीकर ने लंबे समय तक अयोग्यता पर कोई फैसला नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दल-बदल को लेकर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये मुद्दा देश भर में बहस का विषय रहा है और यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया नेताओं के भाषणों का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने संसद में दिए गए कई नेताओं के भाषणों का हवाला भी दिया। कोर्ट ने राजेश पायलट,देवेन्द्रनाथ मुंशी जैसे सांसदों के भाषणों का जिक्र करते हुए कहा कि विधायक/सांसद की अयोग्यता तय करने का अधिकार स्पीकर को इसलिए दिया गया ताकि अदालतों में समय बर्बाद न हो और मामला जल्दी सुलझे। इस बीच, 'दल-बदल' पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, "ये मुद्दा देशभर में बहस का विषय रहा है और यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकता है।"

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह दलील दी गई कि अनुच्छेद 136 और 226 व 227 के तहत स्पीकर के निर्णयों पर न्यायिक समीक्षा की सीमाएं बहुत संकीर्ण हैं। यह भी कहा गया कि चूंकि यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की एक बड़ी पीठ के समक्ष लंबित है, इसलिए मौजूदा सुनवाई नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इन दलीलों का उल्लेख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने तय की डेडलाइन

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को रद्द किया और निर्देश दिया कि कथित तौर पर सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल होने वाले 10 बीआरएस विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही "यथाशीघ्र और तीन महीने के भीतर" तय की जाए। बीआरएस नेता केटी रामाराव, पाडी कौशिक रेड्डी और केपी विवेकानंद ने ये याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

(आईएएनएस इनपुट )

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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