सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2016 गढ़चिरौली आगजनी मामले में अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र गडलिंग के खिलाफ चल रही सुनवाई में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या किसी व्यक्ति को इतने लंबे समय तक बिना ट्रायल के जेल में रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए अहम सवाल
जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा, ट्रायल क्यों नहीं हो रहा? किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के कितने सालों तक हिरासत में रखा जा सकता है?
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि ट्रायल में देरी अभियोजन की वजह से नहीं, बल्कि गडलिंग की वजह से हो रही है। उन्होंने बताया कि गडलिंग ने डिस्चार्ज आवेदन दायर किया है लेकिन जब तक उन्हें अदालत में शारीरिक रूप से पेश होने की अनुमति नहीं मिलती, वह उस पर बहस करने से इंकार कर रहे हैं। राजू ने कहा कि सुरक्षा कारणों से उनकी पेशी संभव नहीं है।
ट्रायल में देरी पर कोर्ट का सख्त रुख
सरकारी की दलील पर जस्टिस महेश्वरी ने टिप्पणी की, अगर बहस नहीं हो रही तो अदालत निर्णय ले सकती है। ऐसा क्यों है कि सिर्फ इसी आधार पर पूरा ट्रायल अटका हुआ है? कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से इस मामले पर स्पष्ट रिपोर्ट देने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र से मांगी गई जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से तीन बिंदुओं पर जानकारी देने का निर्देश दिया है:
1. ट्रायल में देरी का कारण क्या है, इस पर महाराष्ट्र सरकार संक्षेप में जवाब दे
2. लंबित डिस्चार्ज आवेदनों पर अब तक निर्णय क्यों नहीं हुआ, इस पर हलफनामा दायर कर आदेश पत्रों का सारांश प्रस्तुत किया जाए।
3. जांच एजेंसी की योजना स्पष्ट की जाए कि वह ट्रायल को किस तरह आगे बढ़ाना चाहता है और जिन सहआरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है उनके मामले को अलग करके सुनवाई कैसे की जाएगी।
गडलिंग पर लगे हुए हैं गंभीर आरोप
सुरेंद्र गडलिंग के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 की धारा 16, 18, 20 और 23 के तहत मामले दर्ज हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच के दौरान जब्त पत्र और हार्ड ड्राइव से यह सामने आया कि गडलिंग केवल वकील नहीं बल्कि प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के सक्रिय सदस्य भी थे।
सुप्रीम कोर्ट में पहले भी दायर हुई थी याचिका
साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने गडलिंग की याचिका पर नोटिस जारी किया था। वहीं, गडलिंग 2018 से तलोजा जेल में बंद हैं। उन्हें भीमा कोरेगांव मामले में जून 2018 में गिरफ्तार किया गया था और फरवरी 2019 में गढ़चिरौली आगजनी मामले में दोबारा गिरफ्तार किया गया।
हाई कोर्ट ने खारिज की थी डिफॉल्ट बेल
साल 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने गडलिंग और महेश राउत की डिफॉल्ट बेल याचिका भी खारिज कर दी थी। हालांकि, दिसंबर 2021 में सहआरोपी सुधा भारद्वाज को हाई कोर्ट ने डिफॉल्ट बेल दी थी लेकिन गडलिंग समेत आठ अन्य की याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
याचिकाकर्ता के वकील आनंद ग्रोवर की दलील
गडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार ट्रायल को अलग-अलग हिस्सों में नहीं बांट रही है और इससे पूरे मामले में और देरी हो रही है। कोर्ट ने इस पर भी राज्य से स्पष्टता मांगी है।
अगली सुनवाई में रिपोर्ट जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल कर पूरी स्थिति साफ करने का निर्देश दिया है। अब देखना होगा कि सरकार देरी के कारणों और आगे की कार्ययोजना पर क्या जवाब देती है।
