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फिर जेल जाएंगे आनंद मोहन! IAS जी. कृष्णैया की विधवा पत्नी की याचिका पर सुनवाई के लिए SC तैयार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 1, 2023, 12:39 PM IST

Supreme Court: आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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आनंद मोहन की बढ़ेंगी मुश्किलें

Photo : ANI

Supreme Court: बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन के जेल से बाहर आते ही उनकी मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं। दरअसल, बाहुबली नेता की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट आठ मई को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। बता दें, आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

बता दें, गोपालगंज जिले के आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बाहुबली नेता आनंद मोहन का सामने आया था। भीड़ को उकसाने के मामले में वह दोषी पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में कोर्ट ने उनकी सजा को बदलकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

हाल ही में जेल से रिहा हुआ था आनंद मोहन

बिहार की नीतीश सरकार ने बीते 10 अप्रैल को जेल मैनुअल में बदलाव किया था। इस बदलाव के तहत आनंद मोहन समेत 26 कैदियों को सहरसा जेल से रिहा किया गया था। बिहार सरकार ने जिस नियम को बदला था, उसमें पहले ड्यूटी के दौरान हत्या के मामले में जेल से रिहाई का प्रावधान नहीं था। सरकार ने इसे बदल दिया, जिसके बाद आनंद मोहन को रिहा किया गया। उसकी रिहाई के बाद से नीतीश सरकार की खूब आलोचना हो रही है। दिवंगत आईएएस जी. कृष्णैया की पत्नी व बेटी ने भी आनंद मोहन की रिहाई पर सवाल खड़े किए थे।

1994 में हुई थी हत्या

बता दें, आईएएस अधिकारी जी. कृष्णैया की पांच दिसंबर 1994 में हत्या कर दी गई थी। उस दिन एक गैंगस्टर की शव यात्रा में काफी भीड़ उमड़ी थी। इस भीड़ का नेतृत्व आनंद मोहन ही कर रहा था। इसी दौरान जी. कृष्णैया को भीड़ ने पकड़ लिया और उन्हें गोली मार दी गई। भीष को हत्या के लिए उसकाने के लिए आनंद मोहन को दोषी पाया गया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तव author

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रक... और देखें

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