Dharmasthala Mass Burial Case: कर्नाटक के धर्मस्थला विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रोहित पांडे ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को लिखी चिट्ठी के जरिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पांडे ने मांग की है कि सीएन चिन्नैया के मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान से पलटने की घटना की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मामले की सच्चाई सामने आना जरूरी है, वरना जनता का भरोसा न्याय प्रणाली से उठ सकता है।
धर्मस्थला विवाद पर ये नई चिट्ठी क्या कहती है?
अपने पत्र में रोहित पांडे ने लिखा है कि शिकायतकर्ता का मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान से अचानक पीछे हटना बेहद गंभीर संकेत है। उन्होंने आशंका जताई कि यह दबाव या डर का नतीजा हो सकता है। पांडे का मानना है कि ऐसे मामलों में यदि समय रहते जांच न की जाए तो न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि इस पूरे विवाद की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजा गया पत्र
यह पत्र केवल कर्नाटक के मुख्यमंत्री को ही नहीं बल्कि राज्यपाल को भी भेजा गया है। पांडे ने लिखा कि लोकतंत्र में यह सरकार की जिम्मेदारी है कि गवाह सुरक्षित महसूस करें और दबाव में अपने बयान न बदलें। उन्होंने कहा कि गवाहों की सुरक्षा और न्यायिक पारदर्शिता ही इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल है।
धर्मस्थला विवाद की पृष्ठभूमि
धर्मस्थला मंदिर से जुड़े विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एक पूर्व कर्मचारी ने आरोप लगाया कि 1995 से 2014 के बीच उसे कई शवों को गुप्त रूप से दफनाने और जलाने के लिए मजबूर किया गया। आरोपों में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण और हत्या तक की बातें शामिल थीं। इस मामले पर जुलाई 2025 में एफआईआर दर्ज हुई और राज्य सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया।
गवाह के बयान से विवाद और गहराया
एसआईटी की जांच के दौरान शिकायतकर्ता सीएन चिन्नैया ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने पहले बयान से पलटने की कोशिश की। इस कदम ने विवाद को और गहरा दिया। कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि यह बदलाव दबाव का नतीजा है, जबकि सरकार का दावा है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
राजनीतिक हलचल और जनता की नजर
रोहित पांडे की चिट्ठी सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मामले को दबाने की कोशिश समझी जाएगी। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार इस पर गंभीरता से काम कर रही है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या राज्य सरकार गवाहों की सुरक्षा और सच्चाई सामने लाने में सफल होगी।
क्या है धर्मस्थला मंदिर का महत्व?
धर्मस्थला मंदिर कर्नाटक राज्य के दक्षिण कन्नड़ जिले में स्थित है। यह मंदिर नेत्रावती नदी के किनारे, मंगलुरु से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर है। यह स्थल जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान मूलनाथ को समर्पित है, लेकिन यहां पूजा की परंपरा वैदिक रीति से होती है। यही वजह है कि धर्मस्थला को धार्मिक सद्भाव का प्रतीक भी माना जाता है।
