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'जेल में हूं, सोचने के लिए बहुत वक्त मिलता है...' पत्नी सुनीता ने रामलीला मैदान से पढ़ा अरविंद केजरीवाल का मैसेज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 31, 2024, 02:05 PM IST

India Alliance Maharally: इंडिया गठबंधन की महारैली में सुनीता केजरीवाल ने कहा, आपके केजरीवाल शेर हैं। मुझे लगता है कि वे आजादी के समय कोई फ्रीडम फाइटर होंगे, जो देश के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। उन्होंने कहा, इस जन्म में भी शायद उन्हें भारत माता के संघर्ष के लिए भेजा गया है।

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अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल

Photo : ANI

India Alliance Maharally: इंडिया गठबंधन की महारैली में अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी मौजूद रहीं। यह पहली बार है, जब उन्होंने कोई राजनीतिक मंच साझा किया। केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भरी और जनता से पूछा क्या केजरीवाल को इस्तीफा देना चाहिए? सुनीता केजरीवाल ने कहा, आपके केजरीवाल शेर हैं। मुझे लगता है कि वे आजादी के समय को फ्रीडम फाइटर होंगे, जो देश के लिए लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। उन्होंने कहा, इस जन्म में भी शायद उन्हें भारत माता के संघर्ष के लिए भेजा गया है।

इस दौरान सुनीता केजरीवाल ने पति अरविंद केजरीवाल का जेल से लिखा गया मैसेज पढ़कर सुनाया। सुनीता केजरीवाल ने मैसेज पढ़ते हुए कहा, "मेरे प्यारे भारतवासियों! जेल से आप सब अपने इस बेटे, अपने भाई का प्रणाम स्वीकार कीजिए। मैं आज आपसे वोट नहीं मांग रहा। आने वाले चुनाव में मैं आपसे किसी को हराने या जिताने की बात नहीं कर रहा। आज मैं देश के 140 करोड़ लोगों को एक बड़ा भारत बनाने के लिए सहयोग मांगता हूं। 140 करोड़ भारतवासियों को एक नया भारत बनाने के लिए आमंत्रित करता हूं। भारत एक महान देश है, हमारी संस्कृति कई हजार वर्ष पुरानी है। भगवान का दिया सबकुछ है भारत में। फिर भी हम पिछड़े क्यों हैं? हमारे लोग अनपढ़ क्यों हैं? गरीब क्यों हैं?"

'जेल में सोचने के लिए बहुत वक्त मिलता है'

सुनीता केजरीवाल ने मैसेज पढ़ते हुए आगे कहा, मैं जेल में हूं, यहां सोचने के लिए काफी समय मिलता है। रात को टूट-टूटकर नींद आती है। भारत मां के लिए सोचता हूं, भारत मां बहुत दुखी हैं। भारत मां दर्द में है, दर्द से कराह रही है। जब महंगाई की वजह से लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती, तो भारत मां को बहुत दुख होता है, जब भारत मां के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलती, 75 साल बाद भी सही इलाज के बिना लोग मर जाते हैं, तो भारत मां बेबस और लाचार महसूस करती है। जब देश के कई हिस्सों में लंबे-लंबे पॉवर कट होते हैं, सड़कें टूटी हैं...75 साल बाद भी हालत खराब है, तो भारत मां को बहुत पीड़ा होती है। उस पर जब कुछ नेता सुबह-शाम लच्छेदार भाषण देते हैं, शानों-शौकत की जिंदगी जीते हैं, अपने दोस्तों के साथ देश लूटने में लगे हैं, तो भारत मां को बहुत गुस्सा आता है। ऐसे लोगों को भारत मां को सख्त नफरत है।

'आइए नया भारत बनाते हैं'

सुनीता केजरीवाल ने आगे कहा, आइए मिलकर एक नया भारत बनाते हैं। 140 करोड़ लोगों के सपने का भारत। एक ऐसा भारत जहां हर किसी को भरपेट खाना मिलेगा, हर हाथ को काम मिलेगा। कोई बेरोजगार नहीं होगा, कोई गरीब नहीं होगा, कोई अनपढ़ नहीं होगा, हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलेगी, हर बीमार को अच्छा इलाज मिलेगा। देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली होगी, देश के हर गांव में शानदार सड़कें होंगी। एक ऐसा भारत होगा जो पूरे विश्व में शिक्षा का केंद्र होगा, जहां दुनियाभर के युवा पढ़ने के लिए आएंगे, एक ऐसा भारत बनाएंगे जो विज्ञान और टेक्नोलॉजी में वर्ल्ड लीडर होगा। भारत के आध्यात्म को दुनिया के कोने-कोने में ले जाएंगे। एक ऐसा भारत बनाएंगे जहां सबको न्याय मिलेगा, प्रेम और भाईचारा होगा। आज मैं देश के 140 करोड़ लोगों को ऐसा भारत बनाने के लिए आह्वान करता हूं। यदि आप सब इंडिया गठबंधन को मौका देते हैं, जिम्मेदारी सौंपते हैं तो हम सब मिलकर ऐसे महान राष्ट्र का निर्माण करेंगे। हमारे केवल नाम में इंडिया नहीं है, दिल में इंडिया है... दिल में।

केजरीवाल की 6 गारंटी का ऐलान

  1. पूरे देश में 24 घंटे बिजली का इंतजाम करेंगे, कहीं कोई पॉवर कट नहीं होगा। गरीबों की बिजली फ्री करेंगे।
  2. हर गांव और हर मोहल्ले में शानदार सरकारी स्कूल बनाएंगे। गरीबों और अमीरों के बच्चों को समान शिक्षा मिलेगी।
  3. हर गांव-मोहल्ले में मोहल्ला क्लीनिक बनाएंगे। हर जिले में शानदार मल्टीस्पेशिलिटी सरकारी अस्पताल बनाएंगे।
  4. देश के हर व्यक्ति के लिए शानदार और फ्री इलाज की व्यवस्था करेंगे।
  5. किसानों को स्वामीनाथन आयोग के मुताबिक, सही फसलों पर एमएसपी निर्धारित करके उन्हें फसलों के पूरे दाम दिलवाएंगे।
  6. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएंगे।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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