कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा इस समय कर्नाटक में है। कर्नाटक में यात्रा को जयराम रमेश ने कुछ यूं बयां करते हुए कहा कि आप देख सकते हैं कि बीजेपी शासित राज्य में कांग्रेस के लिए कितना उत्साह है, यह 2024 में बीजेपी के लिए किस तरह के नतीजे होंगे उसका उदाहरण है। अब सवाल यह है कि जयराम रमेश के इस बयान के पीछे की वजह क्या है। बता दें कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इस यात्रा में शामिल हैं और कांग्रेस ने दो लाइन(जब भी बढ़े हैं ये कदम,हौसला उनसे हैं पाते हम।) के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि कांग्रेस के लिए सोनिया गांधी का मतलब क्या है। इस यात्रा की यादगार तस्वीर भी सामने आई जिसमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी के जूतों के फीते को बांधते नजर आए और कैप्शन में मां लिखा हुआ है। भारतीय राजनीति में संकेतों का बयानों को अपना अलग महत्व रहा है। 2019 का आम चुनाव याद होगा जब सैम पित्रोदा के क्या है बयान को नरेंद्र मोदी ने अपने पक्ष में बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया और माहौल को पक्ष में बनाने की कोशिश की।
कांग्रेस का बदला अंदाज
कारवां ये बढ़ रहा है हौसला अब मिल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और आज उनकी मौजूदगी ने भारत जोड़ो यात्रा को नई ताकत दे दी।जो प्रण लिया है, पीछे नहीं हटेंगे। लाख मुश्किल आए, हम भारत जोड़ेंगे।।राम करुणा में हैं, राम शांति में हैं, राम एकता में हैं। 'भारत जोड़ो यात्रा' करुणा, शांति, एकता और प्रगति का संदेश का दे रही है।
क्या 2024 पर पड़ेगा असर
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का असर 2024 के चुनाव पर किस तरह पड़ेगा वो नतीजे बता देंगे। लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकारों को यकीन है कि भारत जोड़ो यात्रा के जरिए पार्टी एक बार फिर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होगी। 2024 पार्टी के लिए टर्निंग प्वाइंट हो सकता है। हालांकि यह सवाल है कि अगर विपक्ष खंड खंड बिखरा हो तो क्या नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोक पाना इतना आसान होगा। अगर भारत के राजनीतिक ग्लोब को देखें तो कांग्रेस की अपने बलबूते राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार है, बिहार और झारखंड में मिली जुली सरकार है। अगर बात बिहार की करें तो नीतीश कुमार सीधे तौर पर यह नहीं कहते कि वो दिल्ली की गद्दी के दावेदार हैं। लेकिन जब वो कहते हैं कि नरेंद्र मोदी की सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्ष का एक साथ आना जरूरी है। अब यह एक ऐसा बिंदु है जिसमें यह जानना और समझना दिलचस्प है क्या वो कांग्रेस की अगुवाई में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करेंगे या कांग्रेस किसी गैर कांग्रेसी चेहरे की अगुवाई में चुनाव में जाएगी।
