नई दिल्ली: लालू प्रसाद यादव ( Lalu Prasad Yadav) को झटका देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को शुक्रवार को नौकरी के बदले जमीन घोटाले (Land for Job scam) में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई। पिछले साल सीबीआई ने घोटाले में लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों पर कथित तौर पर भारतीय रेलवे में अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए जमीन के रूप में रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। जब आरजेडी प्रमुख रेल मंत्री थे। संशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में, सरकारी सेवक पर मुकदमा चलाने से पहले एजेंसियों के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी।
पिछले साल अगस्त में सीबीआई ने गुरुग्राम में एक निर्माणाधीन मॉल समेत 27 स्थानों पर छापे मारे, जो कथित रूप से बिहार के डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से जुड़े थे। संघीय जांच एजेंसी ने एमएलसी सुनील सिंह, राज्यसभा सांसद अशफाक करीम और फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय समेत कई राजद नेताओं के परिसरों पर भी छापा मारा था।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल अगस्त में छापेमारी के दौरान 200 से अधिक बिक्री दस्तावेज बरामद किए थे। अक्टूबर, 2022 में सीबीआई ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनकी बेटी मीसा भारती, मध्य रेलवे की पूर्व महाप्रबंधक सौम्या राघवन, पूर्व सीपीओ रेलवे कमल दीप मैनराय, सब्सटीट्यूट के तौर पर नियुक्त सात उम्मीदवारों और चार प्राइवेट लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
यह भी आरोप लगाया गया था कि पटना के कई निवासियों ने बिहार की राजधानी पटना में लालू यादव के परिवार के सदस्यों और आरजेडी सुप्रीमो और उनके परिवार द्वारा नियंत्रित एक प्राइवेट कंपनी को अपनी जमीन बेच दी और उपहार में दे दी। राजद प्रमुख ने 2004-09 तक रेल मंत्री के रूप में कार्य किया।
