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Scrub Typhus: ओडिशा के लिए आफत बना ये जानलेवा कीड़ा, 5 मौतों के बाद अलर्ट मोड पर सरकार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 15, 2023, 07:23 AM IST

Scrub Typhus: यह बीमारी ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है, जो संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से लोगों में फैलता है। यह असल में एक घुन जैसा कीड़ा है, जो घास, झाड़ियों, चूहों, खरगोश और गिलहरियों जैसे जानवरों के शरीर पर देखा जाता है।

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स्क्रब टाइफस

Photo : ANI

Scrub Typhus: ओडिशा के बारगढ़ में एक महीने के अंदर स्क्रब टाइफस से पांच मौतों के बाद सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। सरकार की ओर से सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे ही कुछ मामले शिमला में भी देखने को मिले हैं।

स्क्रब टाइफस के मामले सामने आने के बाद ओडिशा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी मुख्य जिला चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य अधिकारियों, निदेशक, कैपिटल हॉस्पिटल भुवनेश्वर और निदेशक, आरजीएच, राउरकेला को निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि राज्य भर के अधिकांश जिलों से स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस के मामले सामने आ रहे हैं। इसलिए स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस की रोकथाम और प्रबंधन के लिए समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र निदान के लिए गहन निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है।

क्या है स्क्रब टाइफस

स्क्रब टाइफस को बुश टाइफस भी कहा जाता है और यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है। एक्सपर्ट के मुताबिक, यह बीमारी ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है, जो संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से लोगों में फैलता है। यह असल में एक घुन जैसा कीड़ा है, जो घास, झाड़ियों, चूहों, खरगोश और गिलहरियों जैसे जानवरों के शरीर पर देखा जाता है। इंसान जब इनके संपर्क में आता है तो यह काट कर संक्रमण फैलाता है।

ये हैं लक्षण

जानलेवा कीट चिगर्स के काटने के 10 दिन बाद स्क्रब टाइफस के लक्षण दिखना शुरू होते हैं। इसमें संक्रमित व्यक्ति को, तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, बदल दर्द, मांसपेशियों में दर्ट, भ्रम की स्थिति, सूखी खांसी, लाल आंखे, शरीर पर लाला चकत्ते व पपड़ी जैसे घाव हो सकते हैं। कई बार यह संक्रमण शरीर के अंगों के फेल्योर का भी कारण बन जाता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इस संक्रमण के फैलने का सबसे ज्यादा खतरा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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